Bangladesh Hindu violence
Bangladesh Hindu violence: बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ जारी निरंतर हिंसा ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। ब्रिटेन सरकार ने ढाका की अंतरिम सरकार को इस विषय पर कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया है कि वह बांग्लादेश में होने वाले सभी “हिंसक कृत्यों” की सख्त निंदा करती है। ब्रिटिश सरकार ने न केवल मानवाधिकारों की रक्षा की मांग की है, बल्कि आगामी चुनावों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी जोर दिया है।
ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्याओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के वरिष्ठ सांसद बॉब ब्लैकमैन ने लेबर सरकार से आग्रह किया कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि फरवरी 2026 में होने वाले चुनाव तभी सफल माने जाएंगे जब वे पूरी तरह से “स्वतंत्र और निष्पक्ष” होंगे। संसदीय सत्र के दौरान दी गई इस चेतावनी ने बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति की गंभीरता को दुनिया के सामने रखा है।
ब्रिटिश हिंदुओं के लिए बने ‘ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप’ (APPG) के अध्यक्ष बॉब ब्लैकमैन ने बांग्लादेश की “विनाशकारी स्थिति” पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सांसदों को बताया कि वह हिंदुओं की हत्याओं और उनके मंदिरों को जलाए जाने की खबरों से स्तब्ध हैं। ब्लैकमैन के अनुसार, “हिंदू पुरुषों की सड़कों पर सरेआम हत्या की जा रही है, उनके घरों और आस्था के केंद्रों को राख में बदला जा रहा है।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बांग्लादेश की प्रमुख पार्टी अवामी लीग को चुनाव से प्रतिबंधित करना और इस्लामिक चरमपंथियों द्वारा संविधान बदलने की मांग करना लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है।
ब्लैकमैन के अनुरोध पर सरकार की ओर से एलन कैंपबेल ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी। कैंपबेल ने कहा कि यूके सरकार बांग्लादेश की मानवीय स्थिति पर सक्रिय रूप से नज़र रखे हुए है। उन्होंने कहा, “हम धार्मिक या जातीय आधार पर होने वाले किसी भी हिंसक कृत्य की निंदा करते हैं।” हालांकि ब्रिटिश सरकार ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए दिए गए आश्वासनों का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वे इसे लगातार दोहराते रहेंगे ताकि धरातल पर बदलाव दिखे और दोषियों की गिरफ्तारी हो सके।
बांग्लादेश की “चिंताजनक” स्थिति पर ब्रिटिश सांसद और शैडो विदेश सचिव प्रीति पटेल ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने विदेश सचिव यवेट कोपर को पत्र लिखकर मांग की है कि यूके सरकार अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रभाव शक्ति का उपयोग कर बांग्लादेश में स्थिरता लाए। भारतीय मूल की टोरी सांसद ने स्पष्ट कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का हनन और हिंदुओं का उत्पीड़न हर हाल में रुकना चाहिए। उन्होंने एक ऐसे भविष्य की वकालत की जहां हिंदू समुदाय बिना किसी भय के अपनी परंपराओं का पालन कर सके।
बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों के विरोध में लंदन की सड़कों पर भी प्रदर्शन हो रहे हैं। ‘बंगाली हिंदू आदर्श संघ’ (BHAS) के नेतृत्व में ब्रिटिश हिंदू समूहों ने चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी और दीपू दास की सार्वजनिक लिंचिंग की कड़ी निंदा की है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि ढाका प्रशासन इस्लामिक चरमपंथियों पर नकेल कसे और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मानवीय संकट पर अपनी चुप्पी तोड़े। यूके सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह विदेश, विकास एवं राष्ट्रमंडल कार्यालय (FCDO) के माध्यम से इस मुद्दे पर विस्तृत बयान जारी करने पर विचार करेगी।
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