अंतरराष्ट्रीय

Israel-Lebanon Crisis: इजरायल ने जारी किया ‘Yellow Line’ का नक्शा, सीजफायर के बीच लेबनान में नई मोर्चाबंदी!

Israel-Lebanon Crisis: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच लेबनान और इजरायल के बीच आधिकारिक तौर पर सीजफायर (युद्धविराम) की घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन धरातल पर शांति अब भी एक कोरी कल्पना नजर आ रही है। ईरान और अमेरिका की मध्यस्थता के बाद युद्ध रुकने की उम्मीद जगी थी, परंतु इजरायली सेना की हालिया गतिविधियों ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। इजरायल ने पहली बार एक ऐसा नक्शा सार्वजनिक किया है, जो लेबनान की संप्रभुता और सीजफायर की शर्तों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सीजफायर के बावजूद इजरायल का लेबनानी जमीन पर नियंत्रण

इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच हुए समझौते के बाद सीमा पर तोपों की गूंज भले ही शांत हो गई हो, लेकिन इजरायली सेना ने लेबनान के भीतर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) द्वारा जारी किए गए ताजा नक्शे में उन इलाकों को चिह्नित किया गया है, जो वर्तमान में इजरायल के सैन्य नियंत्रण में हैं। यह पहला मौका है जब इजरायल ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि लेबनान के दर्जनों गांव और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके अब उसके कब्जे में हैं।

5 से 10 किलोमीटर गहरा ‘बफर जोन’ बनाने की रणनीति

नक्शे के विश्लेषण से पता चलता है कि इजरायल की ‘डिप्लॉयमेंट लाइन’ (तैनाती रेखा) सीमा के पूरब से पश्चिम तक फैली हुई है। यह रेखा अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार कर लेबनान के अंदर करीब 5 से 10 किलोमीटर तक धंस गई है। इजरायल का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र को एक स्थायी ‘बफर जोन’ (Buffer Zone) में तब्दील करना है। इजरायली रणनीतिकारों का मानना है कि यदि इस इलाके को खाली कराकर अपने नियंत्रण में रखा जाता है, तो हिज्बुल्लाह के लड़ाकों के लिए उत्तरी इजरायल के शहरों पर सीधे हमले करना लगभग असंभव हो जाएगा।

सीमावर्ती गांवों की तबाही और विस्थापन का मंजर

इजरायली सेना ने इस बफर जोन को सुरक्षित करने के लिए लेबनान के सीमावर्ती गांवों में व्यापक स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया है। दर्जनों गांव, जो युद्ध के कारण पहले ही खाली हो चुके थे, अब पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। इजरायल का तर्क है कि इन गांवों का इस्तेमाल हिज्बुल्लाह अपनी सुरंगों और लॉन्च पैड्स के लिए कर रहा था। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि गांवों को तबाह करना लेबनानी नागरिकों को उनके घरों से स्थायी रूप से बेदखल करने की एक सोची-समझी साजिश है।

सीरिया और गाजा जैसी रणनीति का दोहराव

इजरायल की यह कार्रवाई कोई नई बात नहीं है। इससे पहले वह सीरिया के गोलान हाइट्स और गाजा पट्टी की सीमाओं पर भी इसी तरह के बफर जोन बना चुका है। इन क्षेत्रों में इजरायल जमीन के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण रखता है और वहां किसी भी प्रकार की नागरिक बसावट या दुश्मन सेना की मौजूदगी की अनुमति नहीं देता। लेबनान में भी वही मॉडल दोहराया जा रहा है, जिससे यह अंदेशा बढ़ गया है कि इजरायली सेना निकट भविष्य में इन इलाकों को खाली नहीं करेगी।

उत्तरी इजरायल की सुरक्षा बनाम लेबनान की संप्रभुता

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर अपने नागरिकों को उत्तरी इजरायल के घरों में वापस भेजने का भारी दबाव है। ये लोग हिज्बुल्लाह के रॉकेट हमलों के डर से महीनों से विस्थापित हैं। इजरायल का कहना है कि जब तक सीमा पर उसकी सेना की मज़बूत उपस्थिति और बफर जोन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक उसके नागरिक सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे। दूसरी ओर, लेबनान सरकार ने इसे सीजफायर का उल्लंघन और अपनी जमीन पर अवैध कब्जा करार दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या यह सीजफायर वास्तव में शांति लाएगा या केवल एक नए संघर्ष का आधार बनेगा।

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