Tarique Rahman
Tarique Rahman: बांग्लादेश की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पिछली अंतरिम सरकार के फैसलों को पलटने की तैयारी शुरू हो गई है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान कुल 132 अध्यादेश जारी किए थे। संवैधानिक नियमों के अनुसार, यदि इन अध्यादेशों को नई संसद के गठन के 25 दिनों के भीतर पारित नहीं कराया जाता, तो वे स्वतः ही निष्प्रभावी यानी रद्द हो जाएंगे। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार अब इन सभी फैसलों की गहन समीक्षा कर रही है, जिससे यूनुस सरकार द्वारा किए गए बड़े नीतिगत बदलावों पर तलवार लटक गई है।
प्रमुख बांग्लादेशी अखबार ‘समकाल’ की रिपोर्ट के अनुसार, यूनुस सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, प्रशासनिक सुधार और विदेश नीति से संबंधित कई महत्वपूर्ण अध्यादेश जारी किए थे। तारिक रहमान की पार्टी (BNP) का मानना है कि इनमें से कई फैसले विवादास्पद हैं और जनमत के विरुद्ध हैं। विशेष रूप से वे अध्यादेश जो सीधे तौर पर शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध या कड़ी कार्रवाई से जुड़े थे, उनमें बदलाव की संभावना है। संकेत मिल रहे हैं कि अवामी लीग के खिलाफ लगे कुछ प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं ताकि वह विपक्ष के रूप में सक्रिय रह सके।
सत्ता के समीकरण बदलते ही पड़ोसी देश भारत ने भी बांग्लादेश के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। शेख हसीना के देश छोड़ने और उसके बाद हुई अस्थिरता के कारण भारत ने 17 दिसंबर को अपनी वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी थीं। अब तारिक रहमान की सरकार आने के बाद भारत ने इस प्रतिबंध को हटाने और वीजा प्रक्रिया को पुनः सुचारू रूप से शुरू करने का निर्णय लिया है। इस कदम को दोनों देशों के बीच व्यापार और नागरिक आवाजाही को सामान्य करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
मोहम्मद यूनुस सरकार की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा ‘जुलाई चार्टर’ को लागू करना था। इस चार्टर के तहत बांग्लादेश के संविधान में क्रांतिकारी संशोधनों का प्रस्ताव था, जिसमें प्रावधान था कि कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक या 10 साल से ज्यादा प्रधानमंत्री नहीं रह पाएगा। इसके अलावा, जजों की नियुक्ति में प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप को खत्म करने की बात भी कही गई थी। हालांकि, चुनाव जीतने के बाद बीएनपी ने इस चार्टर को मानने से साफ इनकार कर दिया है। बीएनपी के सांसदों ने शपथ ग्रहण के दौरान इस चार्टर के तहत शपथ नहीं ली, जिससे स्पष्ट हो गया कि नई सरकार संविधान में ऐसे बदलावों के पक्ष में नहीं है।
बांग्लादेश के नवनियुक्त गृहमंत्री सलाहुद्दीन चौधरी के अनुसार, अब सभी अध्यादेशों और नीतिगत सुधारों का भविष्य संसद के भीतर तय किया जाएगा। यह भी देखा जा रहा है कि देश के कई जिलों में अवामी लीग के कार्यालय फिर से खुलने लगे हैं और पार्टी गतिविधियां तेज हो रही हैं। तारिक रहमान की सरकार एक संतुलित रुख अपनाना चाहती है जहाँ पिछली सरकार के सुधारों को हटाकर अपनी नई व्यवस्था लागू की जा सके। आने वाले 25 दिन बांग्लादेश की नई दिशा तय करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं।
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