Baruipur Case : पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में नाबालिग के साथ हुए जघन्य बलात्कार और हत्या की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तत्परता दिखाते हुए जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। मुख्यमंत्री ने न केवल मामले पर कड़ी नजर रखी, बल्कि खुद पीड़िता के पिता से फोन पर बात कर उन्हें न्याय का ठोस भरोसा दिलाया। इस त्वरित कार्रवाई का असर यह हुआ कि घटना के कुछ ही घंटों के भीतर तीन प्रमुख आरोपियों—प्रभास मंडल, दिबाकर मंडल और आनंद सरदार को गिरफ्तार कर लिया गया। मंगलवार को मुख्यमंत्री ने स्वयं बरुईपुर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने का संकल्प दोहराया।

एनकाउंटर में मुख्य आरोपी का अंत
जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए, पुलिस टीम मुख्य आरोपी प्रभास मंडल को घटना का दृश्य दोबारा तैयार (रिकंस्ट्रक्शन) करने के लिए घटनास्थल पर ले गई थी। पुलिस सूत्रों का दावा है कि उसी दौरान प्रभास ने पुलिस बल पर हमला करने और हथियार छीनने का दुस्साहस किया। आत्मरक्षा में पुलिस अधिकारी अर्घ्य मंडल द्वारा की गई जवाबी फायरिंग में आरोपी प्रभास मंडल मारा गया। इस कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने चौथे आरोपी कबीर मोल्लाह को भी गिरफ्तार कर लिया। इस तरह, मामले के सभी चारों आरोपी या तो कानून की गिरफ्त में हैं या उनका अंत हो चुका है।

पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री की भूमिका को सराहा
मुख्यमंत्री और पुलिस की तत्परता से पीड़िता के पिता ने गहरा संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मुख्यमंत्री मेरे दादा की तरह हैं। उन्होंने मुझे वादा किया था कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और मुझे उन पर पूरा भरोसा है। मुख्यमंत्री जी और पुलिस ने जिस तरह से इस पूरे मामले को संभाला है, उससे मुझे विश्वास है कि मेरी बेटी को न्याय जरूर मिलेगा।” पिता का यह बयान राज्य प्रशासन के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है, जहाँ त्वरित न्याय ने परिवार के जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया है।

परिवार और समाज की कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया
मुख्य आरोपी प्रभास मंडल की एनकाउंटर में मौत पर उसके अपने ही परिवार की प्रतिक्रिया भी बेहद चौंकाने वाली रही। प्रभास की मां और पत्नी ने उसके चरित्र को ‘अत्यंत खराब’ बताते हुए कहा कि वह नशे का आदी था और समाज के लिए कलंक था। उन्होंने कहा, “उसने जो मासूम बच्ची के साथ किया, उसे उसकी सजा मिल गई है, और यह बिल्कुल सही हुआ है।” पड़ोसियों ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा कि ऐसे अपराध करने वालों का यही अंजाम होना चाहिए। समाज में इसे ‘त्वरित न्याय’ के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य में शांति और कानून का बढ़ता इकबाल
बरुईपुर की इस घटना के बाद से ही पूरे बंगाल में आक्रोश था, लेकिन मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने संभावित अराजकता को नियंत्रित कर लिया। इस मामले में मुख्यमंत्री की सक्रियता यह संदेश देती है कि जघन्य अपराधों के खिलाफ सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। अब पूरे राज्य की नजरें इस मामले की आगामी कानूनी प्रक्रियाओं और चार्जशीट पर टिकी हैं, ताकि दोषियों को उनके किए की पूर्ण सजा मिल सके।
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