Bastar Marathon 2026
Bastar Marathon 2026 : छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बीते 22 मार्च को आयोजित ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन-2026’ अपनी सफलता के बजाय एक विवाद के कारण सुर्खियों में आ गई है। 42 किलोमीटर की इस लंबी और चुनौतीपूर्ण दौड़ में दो महिला प्रतिभागियों ने ईमानदारी के बजाय ‘जुगाड़’ का सहारा लिया। जहाँ अन्य धावक पसीने से तर-बतर होकर फिनिश लाइन की ओर बढ़ रहे थे, वहीं ये दोनों प्रतिभागी बीच रास्ते में गाड़ी का सहारा लेकर जीत की ओर बढ़ीं। इस घटना ने न केवल खेल भावना को आहत किया है, बल्कि पूरे आयोजन की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
यह मैराथन जगदलपुर के लालबाग मैदान से शुरू होकर विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात तक आयोजित की गई थी। 42 किमी की इस दौड़ में लोहंडीगुड़ा की धावक प्रमिला मंडावी ने साहस दिखाते हुए प्रशासन के सामने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाली नेहा और कौशल्या नेताम ने दौड़ का एक बड़ा हिस्सा दौड़कर नहीं, बल्कि वाहन में बैठकर पूरा किया है। प्रमिला की इस शिकायत ने प्रशासन को असमंजस में डाल दिया, जिसके बाद मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए।
जब प्रशासन ने मैराथन रूट पर लगे सीसीटीवी कैमरों और तकनीकी साक्ष्यों की जांच की, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। फुटेज में साफ तौर पर देखा गया कि नेहा और कौशल्या दौड़ के बीच में एक अज्ञात वाहन में सवार हो गईं। चालाकी दिखाते हुए वे फिनिश लाइन से कुछ दूरी पहले वाहन से उतरीं और दोबारा दौड़ में शामिल हो गईं ताकि किसी को उन पर संदेह न हो। उनकी इस ‘शॉर्टकट’ वाली जीत ने उन धावकों की मेहनत पर पानी फेर दिया था, जो घंटों से तपती धूप में अपनी क्षमता का परिचय दे रहे थे।
जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद बस्तर प्रशासन ने तत्काल कड़ा रुख अपनाया। जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने जानकारी दी कि बस्तर कैटेगरी के अंतर्गत इन दोनों प्रतिभागियों को विजेता घोषित किया गया था, लेकिन धोखाधड़ी उजागर होने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से सूची से बाहर कर दिया गया है। प्रशासन ने उनकी प्राइज मनी (इनाम राशि) पर रोक लगा दी है। अब टॉप-10 प्रतिभागियों की एक नई और संशोधित सूची जारी की गई है, जिसमें उन धावकों को जगह दी गई है जिन्होंने पूरी दूरी दौड़कर तय की थी।
सीईओ प्रतीक जैन ने स्पष्ट किया कि खेल में किसी भी प्रकार की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि “इनाम केवल उन्हें ही मिलेगा जिन्होंने वास्तविक पसीने और मेहनत से जीत हासिल की है।” इस मामले के बाद अब भविष्य में होने वाले ऐसे आयोजनों में ‘ट्रैकिंग चिप्स’ और अधिक सख्त निगरानी रखने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इस धोखे ने आयोजन की साख पर बट्टा लगाया है, लेकिन समय रहते हुई जांच ने असली खिलाड़ियों के साथ न्याय सुनिश्चित किया है। यह घटना भविष्य के प्रतिभागियों के लिए एक सबक है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
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