Bastar Transformation
Bastar Transformation: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य को ‘नक्सल-मुक्त’ घोषित किए जाने के दो सप्ताह बाद एक नई और समावेशी विकास यात्रा की शुरुआत की है। दशकों तक हिंसा और संघर्ष की आग में झुलसने वाले बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में अब सुरक्षा अभियानों की जगह ग्रामीण विकास, कृषि और पूर्व माओवादियों के पुनर्वास ने ले ली है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि राज्य अब केवल बंदूकों की गड़गड़ाहट के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता और उन्नत बुनियादी ढांचे के लिए जाना जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपना जीवन किसी संघर्ष गाथा से कम नहीं है। जब वे मात्र 10 वर्ष के थे, तब उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया था। छोटे से बगिया गाँव में उन्होंने अपने परिवार का पेट पालने के लिए खेतों में कड़ी मेहनत की। बचपन में अभावों और संघर्षों को करीब से देखने वाले साय अब उसी कर्तव्यनिष्ठा के साथ राज्य की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने राहत व्यक्त की कि छत्तीसगढ़ आखिरकार उस नक्सलवाद से मुक्त हो गया है, जो वर्षों से प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ था।
नई दिल्ली में दिए गए एक साक्षात्कार के दौरान सीएम साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के रणनीतिक मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि ‘डबल इंजन सरकार’ की इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण ही उस समस्या का समाधान संभव हो पाया, जिसे कभी ‘असंभव’ माना जाता था। गृहमंत्री द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर नक्सलवाद का उन्मूलन राज्य के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।
मुख्यमंत्री ने बस्तर की छवि को पूरी दुनिया के सामने बदलने के लिए ‘बस्तर 2.0’ योजना का खाका तैयार किया है। कभी माओवादियों के गढ़ रहे इस खनिज-समृद्ध क्षेत्र को अब एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य यहाँ उच्च-तकनीकी बुनियादी ढांचा तैयार करना और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है। सीएम साय का मानना है कि बस्तर का भौगोलिक स्वरूप केरल से भी बड़ा है और इसमें पर्यटन की अपार संभावनाएं छिपी हुई हैं।
राज्य सरकार ने ‘नियाद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) पहल के माध्यम से उन 500 से अधिक दुर्गम गाँवों तक पहुँच बनाई है, जहाँ दशकों से कोई सरकारी अधिकारी नहीं पहुँच सका था। इन क्षेत्रों में अब मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं, सड़कें बनाई जा रही हैं और प्रत्येक घर तक बिजली और स्वच्छ पानी सुनिश्चित किया जा रहा है। सुरक्षा शिविरों को अब ‘विकास केंद्रों’ में बदल दिया गया है, जहाँ अस्पताल और स्कूलों की सुविधा ग्रामीणों को सीधे मिल रही है।
बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री ने सिंचाई परियोजनाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। इंद्रावती नदी पर देवगाव और मथना जैसी बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2,000 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को साल भर खेती के लिए पानी उपलब्ध कराना और कृषि उत्पादन में वृद्धि करना है। मुख्यमंत्री का संकल्प है कि विकास का यह ढांचा इतना मजबूत हो कि नक्सलवाद जैसी समस्या दोबारा कभी सिर न उठा सके।
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