Netanyahu's Claim on Iran
Netanyahu’s Claim on Iran : मध्य-पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बड़ा बयान देकर खलबली मचा दी है। नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के विरुद्ध चलाया गया सैन्य अभियान न केवल सफल रहा है, बल्कि इसने तेहरान की सामरिक शक्ति की कमर तोड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायली कार्रवाई ने ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को लगभग समाप्त कर दिया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, अब ईरान इजरायल को चुनौती देने के बजाय खुद के अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
नेतन्याहू ने विस्तार से बताया कि ईरान ने वर्षों से इजरायल को चारों तरफ से घेरने की साजिश रची थी। उन्होंने हमास, हिज़्बुल्लाह, हूती और सीरियाई सरकार जैसे संगठनों को ईरान की ‘प्रॉक्सी’ बताते हुए कहा कि इन सभी के जरिए इजरायल को निशाना बनाया जा रहा था। हालांकि, अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। नेतन्याहू के मुताबिक, यह अभियान अभी पूर्ण विराम पर नहीं पहुँचा है, लेकिन अब तक मिली सफलता ने ईरान के “इजरायल को मिटाने” के मंसूबों को धूल चटा दी है।
इजरायल का यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच हुई सीधी वार्ता विफल हो गई है। इस्लामाबाद में लगभग 21 घंटों तक चली मैराथन बैठकों के बावजूद दोनों पक्ष किसी भी ठोस समझौते पर नहीं पहुँच सके। इस विफलता ने कूटनीतिक गलियारों में चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने वार्ता में पर्याप्त लचीलापन दिखाया, लेकिन ईरान परमाणु हथियार न बनाने का स्पष्ट आश्वासन देने में नाकाम रहा।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी और गैर-परक्राम्य शर्त यह थी कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। जेडी वेंस के अनुसार, ईरान का इस शर्त को न मानना खुद उसके लिए आत्मघाती साबित होगा। दूसरी ओर, ईरान ने इस विफलता का पूरा ठीकरा अमेरिका के सिर फोड़ा है। ईरानी मीडिया का दावा है कि तेहरान ने कई रचनात्मक प्रस्ताव पेश किए थे, लेकिन वाशिंगटन की “अन्यायपूर्ण और अनुचित” मांगों के कारण बातचीत पटरी से उतर गई।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हुंकार भरते हुए कहा है कि इस संघर्ष में अमेरिका को स्पष्ट सैन्य बढ़त हासिल हुई है। उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता में भारी गिरावट का दावा किया और चीन को भी आड़े हाथों लिया। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि बीजिंग ने तेहरान को किसी भी प्रकार का सामरिक या आर्थिक समर्थन दिया, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह बयान वैश्विक राजनीति में गुटबाजी और बढ़ते आर्थिक युद्ध की ओर इशारा करता है।
समुद्री मोर्चे पर भी तनाव चरम पर है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसके दो शक्तिशाली युद्धपोत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पहुँच चुके हैं ताकि वहाँ ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) द्वारा बिछाई गई कथित बारूदी सुरंगों को हटाया जा सके। ईरान ने इन आरोपों को “निराधार” बताते हुए अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि यदि कोई भी विदेशी सैन्य पोत उसके जलक्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करता है, तो उसे ‘गंभीर सैन्य परिणामों’ का सामना करना पड़ेगा। इस बीच, पाकिस्तान ने दोनों देशों से संयम बरतने और सीजफायर का पालन करने की अपील की है।
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