Bengal Tiger
Bengal Tiger: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित सुंदरढूंगा ग्लेशियर वैली में एक ऐसा चौंकाने वाला वाकया सामने आया है, जिसने वन अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। 3010 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित कैमरा ट्रैप में कैद हुई तस्वीरों को देख किसी को यकीन नहीं हो रहा है। उत्तराखंड सरकार ने यह प्रोजेक्ट कुछ समय पहले हिम तेंदुओं (Snow Leopard) के आवास की निगरानी के लिए शुरू किया था, जिसे केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नेशनल मिशन फॉर ग्रीन इंडिया का समर्थन मिला हुआ है।
यूं तो यह प्रोजेक्ट हिम तेंदुओं के अध्ययन के लिए शुरू किया गया था, लेकिन कैमरा ट्रैप में जो कैद हुआ, वह बेहद असाधारण है। आमतौर पर तराई के जंगलों में रहने वाला एक बंगाल टाइगर इतनी लंबी दूरी तय करके और ऊंची चढ़ाई चढ़कर 3010 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया है। इतनी ज्यादा ऊंचाई पर बाघ का पाया जाना उत्तराखंड में वन्यजीवों के वितरण के संबंध में एक चौंकाने वाला और अभूतपूर्व रिकॉर्ड है।
सरकारी प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए कैमरा ट्रैप पर इस तस्वीर का टाइम स्टैम्प 16 मई का है। वन अधिकारियों का मानना है कि यह बागेश्वर डिविजन में बाघ देखे जाने का दूसरी बार का रिकॉर्ड है। यह अब तक का सबसे ऊंचा वेरिफाइड रिकॉर्ड भी है।वन अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कैसे यह बाघ तराई के जंगलों से पहाड़ी जिलों तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों ने भी बाघ को देखने की पुष्टि की है, और इसके पंजों के ताजा निशान भी इलाके में देखे गए हैं।
हालांकि इतनी ऊंचाई पर बाघ का मिलना चौंकाने वाला है, लेकिन इस क्षेत्र में उसके लिए शिकार की कमी नहीं है। कैमरा ट्रैप में 4000 मीटर की ऊंचाई पर भी सांभर, बार्किंग डियर, गोरल और हिमालयन सेरो जैसे जानवर दिखाई दिए हैं। इसका सीधा मतलब है कि बर्फीली वादियों में भी बाघ के लिए भोजन उपलब्ध है। वन अधिकारियों का कहना है कि लगातार निगरानी रखने से यह समझा जा सकेगा कि आखिर बाघ ने इतनी ऊंचाई की यात्रा क्यों और कैसे की।
यह प्रोजेक्ट दो चरणों में चलाया जा रहा है। पहला चरण जुलाई 2024 में खत्म हुआ, और बाघ की तस्वीर इसी दौरान ली गई है। दूसरा चरण दिसंबर 2024 में शुरू हुआ है। अब समीक्षक इस बात की समीक्षा कर रहे हैं कि क्या बाघ साल के कुछ खास महीनों में ही यहां आता है, या फिर भीषण सर्दी के दौरान भी वह इस ऊंचाई पर मौजूद रहता है। इस अभूतपूर्व अध्ययन के निष्कर्ष जल्द ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित जर्नल IUCN Cat News में प्रकाशित हो सकते हैं।
उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व समेत तराई क्षेत्र में बाघों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक, इस क्षेत्र में करीब 260 बाघ हैं। बाघों की गिनती की नए सिरे से प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और माना जा रहा है कि 2022 की तुलना में इनकी संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हो सकती है। बढ़ती आबादी के कारण बाघ नए आवासों की तलाश में ऊंचे इलाकों की ओर जा रहे हैं। पहले बाघ नैनीताल क्षेत्र तक ही देखे गए थे, लेकिन बागेश्वर में जहां बाघ की मौजूदगी दर्ज हुई है, वहां पहुंचना बेहद मुश्किल है, जिसके लिए कई दिनों की ट्रेकिंग और ऊंची पहाड़ियों पर चढ़ाई की जरूरत होती है।
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