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Bengaluru Tunnel: बेंगलुरु टनल विवाद, डीके शिवकुमार vs तेजस्वी सूर्या, सियासी घमासान

Bengaluru Tunnel: बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए कांग्रेस सरकार की ओर से प्रस्तावित टनल रोड योजना को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने इस परियोजना पर सवाल उठाए हैं, जबकि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि उन्हें कोई नहीं रोक सकता।

डीके शिवकुमार ने संवाददाताओं से कहा, “उन्होंने समय मांगा है और मैंने उनसे कहा है कि हम मंगलवार को मिलेंगे। उन्हें सुझाव देने दीजिए। मैं उनका स्वागत करता हूं। केवल भगवान ही मुझे रोक सकते हैं; इस देश में कानून है।” उन्होंने यह भी कहा कि तेजस्वी सूर्या जैसे सांसदों को परियोजना में सुझाव देने और प्रधानमंत्री से वित्तीय मदद लेने की स्वतंत्रता है।

तेजस्वी सूर्या का विरोध

तेजस्वी सूर्या ने सुरंग सड़क योजना का विरोध करते हुए कहा कि यह परियोजना सिर्फ लालबाग और सैंकी टैंक के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर के लिए समस्या बढ़ा सकती है। उनका कहना है कि टनल रोड योजना बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम कम करने के बजाय और बढ़ाएगी और मूल समस्या यानी निजी वाहनों की संख्या कम करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, का समाधान नहीं करेगी।

सुरंग सड़क पर सवाल उठाते हुए सूर्या ने कहा, “हमारा विरोध सिर्फ नाम-पुकारना नहीं है। यह परियोजना जनता के पैसे की बर्बादी होगी। हमें चाहिए कि बेंगलुरु में एक व्यापक शहरी गतिशीलता योजना बनाई जाए। लंबित फ्लाईओवरों के पूरा होने पर कोई आपत्ति नहीं है, हमारी आपत्ति सिर्फ सुरंग सड़क पर है।”

डीके शिवकुमार का जवाब

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने तेजस्वी को सुरंगों के कामकाज और मुंबई-दिल्ली जैसी परियोजनाओं के उदाहरण दिखाने का अवसर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुझावों का स्वागत है और अगर समाधान ठोस होंगे तो खुलकर बहस और चर्चा की जाएगी। डीके शिवकुमार ने यह भी कहा कि सुरंग सड़क परियोजना पर सहयोग और वैकल्पिक सुझाव देने की स्वतंत्रता सांसदों को है, और उनका उद्देश्य केवल बेंगलुरु को एक आधुनिक और रहने योग्य शहर बनाना है।

सियासी और शहरी विमर्श

विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद शहरी योजना और राजनीतिक अहंकार के बीच टकराव का प्रतीक है। तेजस्वी सूर्या का कहना है कि केवल व्यक्तिगत विवाद से शहर को लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि सर्वांगीण शहरी गतिशीलता योजना की आवश्यकता है।

बेंगलुरुवासियों के लिए यह बहस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तय करेगी कि कौन सी परियोजनाएं शहर के ट्रैफिक और पर्यावरण को सुधारने में वास्तव में मदद करेंगी। टनल रोड परियोजना पर विवाद शहर में जनता के पैसे और संसाधनों के उपयोग को लेकर भी सवाल खड़ा करता है।

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