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Greater Israel mission: बेंजामिन नेतन्याहू का ‘ग्रेटर इज़राइल’ मिशन, एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जुड़ी विवादास्पद टिप्पणी

Greater Israel mission:  इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में खुद को ‘ग्रेटर इज़राइल’ के निर्माण के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मिशन से जुड़ा बताया है। इस बयान ने फिलिस्तीनी क्षेत्र, जॉर्डन और मिस्र के कुछ हिस्सों को शामिल करने वाली विवादित अवधारणा को फिर से चर्चा में ला दिया है।

“मैं एक ऐतिहासिक मिशन पर हूं” — नेतन्याहू

इज़रायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ने कहा कि वे “पीढ़ियों से यहूदी लोगों के सपने” को पूरा करने के उद्देश्य से एक मिशन पर हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें ग्रेटर इज़राइल के विजन से जुड़ाव महसूस होता है, तो उनका जवाब था, “बहुत ज़्यादा।” नेतन्याहू ने कहा, “यदि आप मुझसे पूछें कि क्या ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से मेरे भीतर कोई मिशन काम कर रहा है, तो जवाब है हां। यह केवल मेरे जीवन का हिस्सा नहीं है, यह यहूदी सभ्यता का हिस्सा है।”

साक्षात्कार में मिला ग्रेटर इज़राइल का ताबीज

यह साक्षात्कार इजरायली पत्रकार और पूर्व सांसद शेरोन गैल द्वारा लिया गया। उन्होंने नेतन्याहू को एक ताबीज भेंट किया, जिसमें कथित रूप से “वादा किए गए देश” यानी ग्रेटर इज़राइल का नक्शा था। इस नक्शे में न केवल वर्तमान इज़राइल बल्कि पूर्वी यरुशलम, पश्चिमी तट, गाज़ा पट्टी, सिनाई प्रायद्वीप और जॉर्डन के कुछ हिस्से शामिल थे।

ग्रेटर इज़राइल की ऐतिहासिक अवधारणा

‘ग्रेटर इज़राइल’ की अवधारणा कोई नई नहीं है। यह विचार 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के बाद सामने आया, जब इज़राइल ने कई क्षेत्रों पर कब्जा किया था। ज़ायोनी विचारधारा के शुरुआती नेताओं जैसे कि जीव जाबोटिंस्की ने भी इस अवधारणा को समर्थन दिया था, जिसमें वर्तमान इज़राइल के साथ-साथ फिलिस्तीन और जॉर्डन के बड़े हिस्से शामिल थे।

अंतरराष्ट्रीय चिंताएं और संभावित प्रभाव

नेतन्याहू के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। फिलिस्तीनी नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने इसे क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाने वाला बताया है। अगर यह विचार सरकारी नीति में बदलता है, तो इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है, विशेषकर फिलिस्तीनियों और इज़राइल के पड़ोसी देशों के बीच।

बेंजामिन नेतन्याहू का ग्रेटर इज़राइल को लेकर आत्मिक जुड़ाव और ऐतिहासिक दृष्टिकोण न केवल उनके राजनीतिक एजेंडे की झलक देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि इज़राइल की क्षेत्रीय नीतियां किस दिशा में बढ़ सकती हैं। आने वाले दिनों में यह बयान राजनीतिक और कूटनीतिक हलचलों का केंद्र बना रह सकता है।

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