Bhilai Nagar Nigam
Bhilai Nagar Nigam: छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर निगम द्वारा प्रियदर्शिनी परिसर पश्चिम में एक अत्याधुनिक स्विमिंग पूल का निर्माण कराया जा रहा है। लगभग 4.93 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट का काम शुरू हो चुका है और अब तक करीब 5 फीट तक की खुदाई भी की जा चुकी है। लेकिन जैसे-जैसे निर्माण आगे बढ़ रहा है, इस प्रोजेक्ट की दिशा और स्थान को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। खेल विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि तकनीकी बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो जनता के करोड़ों रुपये बर्बाद हो सकते हैं।
स्विमिंग एक्सपर्ट्स और एनआईएस (NIS) कोच तामेश्वर घंघोरी ने तकनीकी मानकों को लेकर बड़ी खामी उजागर की है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों के तहत खुले (Open) स्विमिंग पूल हमेशा उत्तर-दक्षिण (North-South) दिशा में बनाए जाने चाहिए। इस व्यवस्था का वैज्ञानिक कारण यह है कि सुबह और शाम के समय सूर्य की सीधी किरणें तैराकों की आंखों पर नहीं पड़तीं। प्रियदर्शिनी परिसर में बन रहा यह पूल पूर्व-पश्चिम दिशा में है, जिसका अर्थ है कि अभ्यास या प्रतियोगिता के दौरान सूरज की रोशनी खिलाड़ियों के प्रदर्शन में बाधा डालेगी। जानकारों का कहना है कि इस गलत दिशा के कारण भविष्य में यहाँ किसी भी नेशनल स्तर की आधिकारिक प्रतियोगिता का आयोजन संभव नहीं हो सकेगा।
निर्माण स्थल के चयन को लेकर केवल तकनीकी ही नहीं, बल्कि भौगोलिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस स्थान पर खुदाई की गई है, वह सुपेला के ‘कोसा नाला’ के समीप स्थित है और प्राकृतिक रूप से एक डूब क्षेत्र (Drowning Zone) है। बारिश के मौसम में इस पूरे इलाके में भारी जलभराव हो जाता है। निवासियों का आरोप है कि बिना मुरुम या डस्ट फिलिंग के सीधे खुदाई शुरू कर दी गई है। यदि जमीन की ऊंचाई बढ़ाए बिना निर्माण कार्य पूरा होता है, तो मानसून के दौरान यह करोड़ों का स्विमिंग पूल एक गंदे तालाब में तब्दील हो सकता है।
भिलाई नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने निर्माण कार्य का निरीक्षण करने के बाद नगर निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे भारी अनियमितता और लापरवाही का नमूना बताया है। सिन्हा का कहना है कि पूल की डिजाइन पूरी तरह से गलत है और तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसी दोषपूर्ण डिजाइन के साथ काम जारी रहा, तो यह खिलाड़ियों के उपयोग के लायक नहीं रहेगा और केवल एक साधारण तालाब बनकर रह जाएगा। उन्होंने मांग की है कि निर्माण को तुरंत मानकों के अनुरूप सुधारा जाए।
कोच घंघोरी ने स्पष्ट किया कि नेशनल स्तर के आयोजन के लिए पूल की लंबाई 50 मीटर और चौड़ाई 25-26 मीटर होनी अनिवार्य है, ताकि इसमें कम से कम 10 लेन की व्यवस्था हो सके। साथ ही इसकी गहराई लगभग 2 मीटर होनी चाहिए। विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि बुनियादी ढांचे में ही कमी रह गई, तो भविष्य में भिलाई को किसी बड़े खेल आयोजन की मेजबानी मिलने में भारी कठिनाई आएगी और स्थानीय प्रतिभाओं को अभ्यास के लिए सही वातावरण नहीं मिल सकेगा।
उठ रहे विवादों के बीच भिलाई नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी तिलेश्वर साहू ने विभाग का पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि निगम को अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है। दिशा के विवाद पर उन्होंने सफाई दी कि हर स्थल की भौगोलिक स्थिति अलग होती है और परिस्थितियों के अनुसार दिशा में फेरबदल संभव है। उन्होंने आश्वासन दिया कि निर्माण कार्य स्वीकृत प्राक्कलन (Estimate) के अनुसार ही हो रहा है और सभी तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि निर्माण में कोई कमी न रहे।
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