धर्म

Blue Moon May 2026 : मई में दिखेगा ‘ब्लू मून’ का जादू, 1 और 31 तारीख को चमकेगा पूरा चाँद

Blue Moon May 2026 : धार्मिक और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 का मई महीना अपने आप में एक बेहद दुर्लभ और पवित्र संयोग लेकर आ रहा है। इस महीने की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी शुरुआत भी पूर्णिमा तिथि से हो रही है और इसका समापन भी पूर्णिमा के साथ ही होगा। 1 मई को वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) के साथ महीने का आगाज होगा, जबकि 31 मई को ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के साथ इस महीने की विदाई होगी। ज्योतिषविदों का मानना है कि ऐसा संयोग दशकों में कभी-कभार ही बनता है, जो साधकों के लिए पुण्य कमाने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है।

महीने का शुभारंभ: 1 मई को वैशाख बुद्ध पूर्णिमा का पावन पर्व

मई महीने की पहली तारीख को ही वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि पड़ रही है। इसे ‘बुद्ध पूर्णिमा’ के रूप में पूरे विश्व में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में वैशाख पूर्णिमा को अत्यंत फलदायी माना गया है, क्योंकि यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। वहीं, बौद्ध अनुयायियों के लिए यह त्रिविध पावन दिवस है, क्योंकि इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ, उन्हें बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति हुई और इसी तिथि को उनका महापरिनिर्वाण भी हुआ था। इस दिन स्नान-दान से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

पूर्णिमा का धार्मिक महत्व: अक्षय पुण्य और जल दान की महिमा

शास्त्रों में वर्णित है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन जो व्यक्ति पवित्र नदियों में स्नान करता है और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन विशेष रूप से जल से भरे पात्र, घड़े और प्याऊ लगवाने का महत्व है। माना जाता है कि गर्मी के इस मौसम में राहगीरों को जल पिलाने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। स्नान और तप के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना गया है।

महीने का समापन: 31 मई को ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का विशेष फल

मई महीने का अंत भी एक विशेष तिथि ‘ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा’ के साथ होने जा रहा है। 31 मई को पड़ने वाली यह पूर्णिमा इसलिए खास है क्योंकि यह अधिक मास (मलमास) के अंतर्गत आती है। अधिक मास की पूर्णिमा लगभग ढाई से तीन साल के अंतराल में एक बार आती है, जिसे ‘पुरुषोत्तम मास’ की पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को अति प्रिय है और इस दिन की गई साधना का फल अन्य सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

शास्त्रों की दृष्टि में महत्व: सर्व सिद्धिदायिनी है यह तिथि

स्कंद पुराण, पद्म पुराण और नारद पुराण जैसे प्रतिष्ठित ग्रंथों में अधिक मास की पूर्णिमा को ‘सर्व सिद्धिदायिनी’ कहा गया है। इसका अर्थ है कि यह तिथि साधक की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली और कार्यों में सफलता प्रदान करने वाली होती है। भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करने से दरिद्रता का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यह तिथि नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर जीवन में सकारात्मकता का संचार करती है।

पुण्य फल प्राप्ति के उपाय: व्रत, दान और सत्यनारायण कथा

इस दुर्लभ संयोग का लाभ उठाने के लिए भक्तों को कुछ विशेष कार्य करने की सलाह दी जाती है। इन दोनों पूर्णिमा तिथियों पर व्रत रखना और सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना अत्यंत कल्याणकारी होता है। पवित्र नदियों में स्नान संभव न हो तो घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। क्षमता अनुसार अन्न, वस्त्र और शीतल फलों का दान करना चाहिए। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने से जातक को मानसिक क्लेशों से मुक्ति मिलती है और पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

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