Bhind assault video : मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गोहद क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां दो युवकों के साथ दबंगों ने न केवल बेरहमी से मारपीट की, बल्कि उन्हें गालियां देकर जबरन पैर छूने के लिए भी मजबूर किया। ये पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई और शनिवार की रात सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में पीड़ित युवकों को लात-घूंसों और प्लास्टिक के पाइप से पीटते हुए साफ देखा जा सकता है।
घटना 9 जुलाई की, वायरल वीडियो ने खोली पुलिस की नींद
इस अमानवीय वारदात को 9 जुलाई को अंजाम दिया गया था, जो बरथरा रोड इलाके में हुई थी। उस वक्त पुलिस को मामूली शिकायत मिली थी, लेकिन जब शनिवार को वीडियो वायरल हुआ, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर काफी गुस्सा है और पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पीड़ित इरफान की आपबीती
फरियादी इरफान खान ने पुलिस को दिए शिकायती आवेदन में बताया कि उसका मोबाइल अजय जाटव नामक युवक के पास था। मोबाइल लौटाने के बहाने आरोपियों ने उसे बुलाया। इरफान अपने दो दोस्तों, राज और अमन, के साथ वहां पहुंचा, लेकिन वहां पर पहले से मौजूद अजय और उसके साथी उन्हें घेरकर सुनसान इलाके में ले गए। वहां तीनों को पीटा गया और उन्हें धमकाया गया।
हत्या के केस में जमानत पर है मुख्य आरोपी अजय जाटव
इरफान का कहना है कि मुख्य आरोपी अजय जाटव हाल ही में हत्या के एक मामले में जेल से जमानत पर बाहर आया है। उसे पहले से ही आपराधिक प्रवृत्ति का बताया जा रहा है। इरफान ने आरोप लगाया कि अजय और उसके साथियों ने उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और इस दौरान वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।
वीडियो में दिखी क्रूरता: पीड़ितों से जबरन पैर छुववाए, छोड़ने की लगाई गुहार
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि दबंग युवक पीड़ितों को पीटते हुए बार-बार गालियां दे रहे हैं और उन्हें धमकाते हुए उनके पैर छूने को कह रहे हैं। पीड़ित युवक लगातार गिड़गिड़ाते हैं और छोड़ देने की मिन्नतें करते हैं, लेकिन आरोपियों पर इसका कोई असर नहीं होता। यह दृश्य न सिर्फ अमानवीय था, बल्कि समाज में डर और असुरक्षा की भावना को भी उजागर करता है।
पुलिस की कार्यशैली पर सवाल: पीड़ित को बयान के लिए बुलाया लेकिन कार्रवाई नहीं
गोहद थाना प्रभारी मनीष धाकड़ ने बताया कि इरफान ने 9 जुलाई को शिकायत की थी और उसे बयान देने के लिए थाने बुलाया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ। थाना प्रभारी का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह विवाद सोशल मीडिया पर शुरू हुए गाली-गलौज से जुड़ा है। हालांकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी।
जनता में रोष, आरोपी खुलेआम घूम रहे
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आरोपियों की पहचान हो चुकी है और वीडियो सबूत के तौर पर मौजूद है, तो पुलिस को तुरंत गिरफ्तारी करनी चाहिए थी। लेकिन अब तक न तो किसी की गिरफ्तारी हुई है और न ही पुलिस ने किसी आरोपी को हिरासत में लिया है। इस वजह से लोगों में पुलिस की निष्क्रियता और प्रभावहीनता को लेकर गहरा आक्रोश है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय: वीडियो पर्याप्त सबूत, तत्काल गिरफ्तारी बनती है
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराएं लागू होती हैं जैसे:
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323 – स्वेच्छा से चोट पहुँचाना
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504 – जानबूझकर अपमान करना
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506 – आपराधिक धमकी देना
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342 – अनुचित तरीके से कैद में रखना
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295A – धार्मिक भावना भड़काना (अगर धर्म से जुड़ी गालियां दी गई हों)
इन धाराओं के तहत बिना बयान के भी वीडियो के आधार पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
सवालों के घेरे में पुलिस और प्रशासन
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आम नागरिकों की सुरक्षा अब सोशल मीडिया वीडियो के भरोसे रह गई है? पुलिस का रवैया अगर ऐसा ही रहा तो अपराधियों के हौसले और बढ़ेंगे। वायरल वीडियो में न सिर्फ मारपीट, बल्कि मानसिक उत्पीड़न और अपमान का भी गंभीर मामला सामने आया है।
न्याय की प्रतीक्षा में पीड़ित, सख्त कार्रवाई की मांग
पीड़ितों ने न्याय की उम्मीद में पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। अब देखना यह है कि पुलिस इस वीडियो के आधार पर कितनी तेजी से कार्रवाई करती है। अगर इस मामले में आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो यह न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल उठाएगा बल्कि आम जनता में असुरक्षा की भावना और बढ़ेगी।जनता की मांग है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर, उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और पीड़ितों को सुरक्षा दी जाए।