Bhopal Kisan Mahapanchayat
Bhopal Kisan Mahapanchayat: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल आज एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बनने जा रही है। कांग्रेस पार्टी ने यहाँ एक विशाल ‘किसान महापंचायत’ का आह्वान किया है, जिसे पार्टी के राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी विशेष रूप से शामिल हो रहे हैं। कांग्रेस का मुख्य एजेंडा भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम ट्रेड डील का विरोध करना है। पार्टी का आरोप है कि यह समझौता पूरी तरह से ‘किसान विरोधी’ है और इससे कपास, सोयाबीन व मक्का उत्पादक किसानों की आय और बाजार पर बेहद बुरा असर पड़ेगा।
कांग्रेस की इस महापंचायत ने मध्य प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर किसानों के बीच भ्रम फैलाने का गंभीर आरोप लगाया है। सीएम ने कहा कि राहुल गांधी किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपनी इस “गंदी राजनीति” और किसानों को भ्रमित करने के लिए उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकाल मंदिर जाकर बाबा महाकाल से क्षमा मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन को विकास विरोधी और संकीर्ण मानसिकता का परिचायक बताया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि जो काम कांग्रेस पिछले 55 वर्षों के शासन में नहीं कर पाई, वह भाजपा सरकार ने बहुत कम समय में कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सिंचाई क्षमता के विस्तार और नए टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना के जरिए किसानों के लिए समृद्धि के द्वार खोले हैं। सीएम ने विशेष रूप से सोयाबीन किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि ‘भावांतर योजना’ के तहत किसानों को 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सीधे उनके खातों में भेजी गई है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस के शासनकाल में ही सबसे ज्यादा कॉटन मिलें बंद हुई थीं, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा था।
हाल ही में आयोजित ‘इन्वेस्ट मध्य प्रदेश – एआई समिट’ के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन पर भी मुख्यमंत्री ने कड़ी आपत्ति जताई। सीएम ने कहा कि कपड़े उतारकर प्रदर्शन करना एक “गंदी मानसिकता” को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के कृत्यों से न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब होती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जब सरकार निवेश लाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए समिट आयोजित कर रही है, तब कांग्रेस द्वारा इस तरह का व्यवहार राज्य के विकास में बाधा उत्पन्न करने जैसा है।
दूसरी ओर, कांग्रेस इस महापंचायत के माध्यम से ग्रामीण और किसान वोट बैंक को फिर से सक्रिय करने की कोशिश में है। राहुल गांधी का मानना है कि अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील से भारत के कपास और सोयाबीन बाजारों में विदेशी प्रतिस्पर्धा अनियंत्रित हो जाएगी, जिससे स्थानीय किसानों को एमएसपी (MSP) मिलना भी मुश्किल होगा। कांग्रेस इस अभियान को भोपाल से शुरू करके उन छह राज्यों में ले जाने वाली है जहाँ खेती अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। पार्टी का उद्देश्य यह दिखाना है कि केंद्र की नीतियां कॉर्पोरेट घरानों के पक्ष में और अन्नदाताओं के विपक्ष में हैं।
भोपाल की यह महापंचायत महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के लिए बिछाई जा रही बिसात भी है। जहाँ कांग्रेस किसानों के भावनात्मक मुद्दों को हवा दे रही है, वहीं भाजपा अपनी कल्याणकारी योजनाओं और “डबल इंजन” सरकार के फायदों को गिनाकर जवाबी हमला कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस का यह ‘राष्ट्रीय किसान अभियान’ किसानों को लामबंद करने में सफल होता है या मुख्यमंत्री का ‘सुशासन मॉडल’ जनता के बीच अपनी पैठ बनाए रखता है।
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