Shashank Singh : आईपीएल की प्रसिद्ध टीम पंजाब किंग्स के होनहार क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पिता, जो कि एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) आईपीएस अधिकारी हैं, शैलेश सिंह, एक गंभीर कानूनी विवाद में फंस गए हैं। भोपाल के रातीबड़ थाने में उनके खिलाफ एक रसोइए (कुक) के साथ मारपीट, अभद्र भाषा का प्रयोग और जबरन काम करवाने के गंभीर आरोप में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इस मामले ने न केवल खेल जगत बल्कि प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा छेड़ दी है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नौकरी का झांसा और भोपाल बुलाने की पूरी कहानी
पीड़ित रसोइए विपेंद्र सिंह ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि उसे यह काम रीवा के एक परिचित व्यक्ति के माध्यम से मिला था। उसे प्रलोभन दिया गया था कि शैलेश सिंह के घर पर रसोइए के तौर पर काम करने से न केवल उसे 15 हजार रुपये मासिक वेतन, भोजन और रहने की सुविधा मिलेगी, बल्कि भविष्य में सरकारी नौकरी लगवाने में भी मदद की जाएगी। इन वादों के चलते विपेंद्र भोपाल पहुंचा, लेकिन वहां पहुंचते ही उसे अहसास हुआ कि सच्चाई उन दावों से कोसों दूर थी।
काम का भारी दबाव और बंधक बनाकर मारपीट के आरोप
विपेंद्र का आरोप है कि घर पहुंचते ही उस पर अमानवीय तरीके से काम का दबाव बनाया जाने लगा। जब उसने स्थितियों को देखते हुए काम छोड़ने की इच्छा जताई, तो उसे कथित तौर पर धमकाया गया। आरोप है कि उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया और उसे वहां से जाने नहीं दिया गया। भयभीत होकर जब उसने खुद को एक कमरे में बंद किया, तो दरवाजा तोड़कर शैलेश सिंह, शशांक सिंह और उनके ड्राइवर ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। पीड़ित ने अपने चेहरे और शरीर पर चोट के गंभीर निशान होने का दावा किया है।
कानूनी धाराओं के तहत पुलिस की जांच जारी
पुलिस ने इस मामले में कठोर कदम उठाते हुए शैलेश सिंह, शशांक सिंह और उनके ड्राइवर के खिलाफ बीएनएस की धारा 296(बी), 115(2) और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। रातीबड़ पुलिस के अनुसार, यह मामला काफी संवेदनशील है, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो। फिलहाल आरोपी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच के परिणामों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
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