Cinereous Vulture
Cinereous Vulture : ‘पंछी नदियां पवन के झोंके, कोई सरहद न इन्हें रोके’—फिल्म रिफ्यूजी का यह प्रसिद्ध गीत उस समय हकीकत में बदल गया जब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क से छोड़ा गया एक दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध उड़ते हुए पाकिस्तान जा पहुंचा। इंसानों के लिए भारत-पाकिस्तान की सीमा लांघना भले ही चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन इस शिकारी पक्षी ने साबित कर दिया कि प्रकृति और वन्यजीवों के लिए सरहदों की कोई अहमियत नहीं होती। भोपाल के आसमान से शुरू हुआ इसका सफर करीब 1100 किलोमीटर दूर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित खानेवाल जिले में जाकर रुका।
यह सिनेरियस गिद्ध मार्च के महीने में भोपाल के हलाली बांध क्षेत्र से टैग लगाकर छोड़ा गया था। ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह पक्षी 6 अप्रैल को पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुआ। हालांकि, वहां जबरदस्त ओलावृष्टि और खराब मौसम की चपेट में आने के कारण वह घायल होकर गिर पड़ा। जब वन विहार के अधिकारियों को जीपीएस के माध्यम से इसके घायल होने का आभास हुआ, तो तुरंत WWF India को सूचित किया गया। इसके बाद एक अनोखा अंतरराष्ट्रीय बचाव अभियान शुरू हुआ। WWF India ने WWF Pakistan के साथ संपर्क साधा और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से गिद्ध को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। यह संभवतः पहला मामला है जब किसी लापता पक्षी को खोजने के लिए दो देशों के बीच इस स्तर पर तालमेल बिठाया गया।
वन विहार के अधिकारियों ने बताया कि गिद्ध की पीठ पर एक अत्याधुनिक GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस लगाया गया था, ताकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। फिलहाल यह डिवाइस लापता है। भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तान के वन अधिकारियों से इस डिवाइस को खोजने का अनुरोध किया है। यदि वह यंत्र नहीं मिलता है, तो भारत की ओर से एक नया डिवाइस भेजने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि बिना ट्रैकिंग डिवाइस के गिद्ध को दोबारा जंगल में छोड़ना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इससे उसकी भविष्य की लोकेशन का पता नहीं चल पाएगा।
सिनेरियस गिद्ध दुनिया के सबसे विशाल और वजनदार पक्षियों में गिने जाते हैं। इनकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
कद और विस्तार: इनकी ऊंचाई लगभग 3 से 4 फीट होती है, लेकिन जब ये अपने पंख फैलाते हैं, तो उनका विस्तार (Wingspan) 10 फीट तक हो सकता है।
वजन: एक वयस्क सिनेरियस गिद्ध का औसत वजन 27 पाउंड (लगभग 12 किलोग्राम) तक हो सकता है।
पर्यावरण रक्षक: ये पक्षी ‘प्रकृति के सफाईकर्मी’ कहलाते हैं। ये मृत पशुओं के शवों को खाकर बीमारियों के प्रसार को रोकते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं।
भारत में गिद्धों की आबादी पिछले कुछ दशकों में तेजी से गिरी है। उदाहरण के तौर पर, गुजरात में 12 साल पहले लगभग 15,000 गिद्ध थे, जिनकी संख्या अब घटकर महज 950 रह गई है। वर्ष 2005 से सरकार और विभिन्न एनजीओ इनके संरक्षण के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं। भोपाल का यह अभियान भी इसी संरक्षण कड़ी का हिस्सा था। वर्तमान में पाकिस्तान के खानेवाल में इस गिद्ध का इलाज चल रहा है और उसकी स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही यह विशाल पक्षी एक बार फिर मुक्त गगन में उड़ान भर सकेगा।
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