Bhupesh Baghel Allegation : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर सरकार और भाजपा समर्थकों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि एक ‘डिजिटल सुपारी गैंग’ उनकी और कांग्रेस की छवि खराब करने के लिए सक्रिय है। बघेल ने कहा कि अखबारों में झूठी खबरें, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाई गई तस्वीरों का दुरुपयोग और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मदद से फैलाया जा रहा झूठ— यह सब एक संगठित साजिश का हिस्सा है।
भूपेश बघेल ने लिखा कि यह पूरा खेल सरकार के इशारे पर हो रहा है और इसमें शामिल अधिकारियों व पीआर एजेंसियों के नाम उनके पास पहुंच चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी फंड के राजनीतिक इस्तेमाल का पूरा हिसाब लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “समय से बड़ा कोई नहीं होता। कमलछाप नौकरशाह और एजेंसियां सब जवाबदेह होंगी।”
पूर्व मुख्यमंत्री के आरोपों पर भाजपा नेत्री राधिका खेड़ा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बघेल जब मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने अपने खास लोगों को करोड़ों रुपये का फायदा पहुंचाया। राधिका ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि जन पोर्टल को सरकारी फंड दिया गया, जो कांग्रेस संचार विभाग के दो नेताओं से जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि बघेल ने इन पोर्टल्स से स्वयं भी लाभ उठाया।
राज्य की राजनीति अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रही, सोशल मीडिया भी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। विधायक, सांसद और पार्टी के अन्य नेता रोजाना औसतन 5-6 पोस्ट कर रहे हैं, जबकि पार्टी के आधिकारिक अकाउंट्स से प्रतिदिन 15 से 20 पोस्ट साझा किए जा रहे हैं। इन पोस्ट्स में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप, घोटाले और जवाबी दावे शामिल होते हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में सोशल मीडिया अब परंपरागत प्रचार तंत्र से अधिक प्रभावशाली हो गया है। हर मुद्दे पर तुरंत प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। नन विवाद, ईडी के छापे और खदान आवंटन से जुड़े मामलों पर भी यही ट्रेंड देखा जा रहा है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीति के तहत सोशल मीडिया को पूरी तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
भूपेश बघेल और भाजपा के बीच छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई डिजिटल जंग छिड़ चुकी है। जहां पूर्व मुख्यमंत्री इसे सुनियोजित साजिश बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे उनके कार्यकाल के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करार दे रही है। चुनाव से पहले ऐसे आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति और तेज़ होने की संभावना है।
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