Chhattisgarh Voter List
Chhattisgarh Voter List: असम के दौरे से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर लौटे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर भाजपा सरकार पर कड़ा हमला बोला है। बघेल ने सरकार पर सत्ता के अहंकार में डूबे होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान शासन लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहा है। उन्होंने एक गंभीर तंज कसते हुए कहा कि पहले जनता अपनी सरकार चुनती थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं और सरकार खुद अपने मतदाता चुन रही है। पूर्व मुख्यमंत्री का दावा है कि राजनीतिक मंशा के तहत विपक्षी विचारधारा वाले मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है और सूची से उनके नाम सुनियोजित तरीके से काटे जा रहे हैं।
भूपेश बघेल ने अपनी प्रेस वार्ता के दौरान इस प्रक्रिया को केवल प्रशासनिक त्रुटि मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से खोज-खोज कर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, वह सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध को दर्शाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां इतनी संकुचित हो गई हैं कि वे अब साधु-संतों का अपमान करने से भी पीछे नहीं हट रही हैं। बघेल के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों को दरकिनार कर दिया गया है, जो आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति के लिए एक खतरनाक संकेत है।
मतदाता सूची में दावा-आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि 22 जनवरी तक प्रदेश भर से कुल 1.97 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, मतदाता सूची से कुल 19.13 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। हालांकि, 23 दिसंबर को जब प्रारंभिक सूची का प्रकाशन हुआ था, तब कुल 27.34 लाख नाम विलोपित किए गए थे। इनमें से 6.42 लाख नाम मृत्यु के कारण हटाए गए, जबकि शेष 19.13 लाख लोगों को ‘स्थानांतरित’ (Shifted) श्रेणी में रखा गया है। इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा हुआ है और मतदाता अपने संवैधानिक अधिकार को लेकर चिंतित हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब केवल प्राप्त दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। आयोग ने लगभग 6 लाख ऐसे लोगों को नोटिस जारी किए हैं जिन्हें ‘अनट्रेस’ माना गया है। इन मतदाताओं को अपनी पहचान और निवास साबित करने के लिए निर्धारित 13 वैध दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यह पूरी सत्यापन प्रक्रिया 14 फरवरी तक चलेगी, जिसके बाद 21 फरवरी को आधिकारिक रूप से अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि अब जो भी नाम जुड़ेंगे, उन्हें ‘नए मतदाता’ के रूप में ही पंजीकृत किया जाएगा, चाहे उनका नाम पहले कभी सूची में रहा हो या नहीं।
एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया के अगले चरण में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को एक महत्वपूर्ण और जटिल कार्य सौंपा गया है। अब बीएलओ उन मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच करेंगे जिनका नाम 2025 की सूची में तो है, लेकिन 2003 की पुरानी सूची में दर्ज नहीं था। कई मामलों में रिश्तेदारों के पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गई हैं, जिसके कारण हजारों नाम अधर में लटके हुए हैं। बीएलओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे घर-घर जाकर संदर्भों की जांच करें ताकि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से बाहर न रहे।
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