Mahadev Satta Case: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले को लेकर सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया है कि महादेव सट्टा का खुलेआम प्रचार-प्रसार हो रहा है और फेसबुक पर इसके विज्ञापन भी दिखने लगे हैं। भूपेश ने सवाल उठाया है कि आखिर इस अवैध ऑनलाइन सट्टा को किसका राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है—केंद्रीय गृह मंत्री का या छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री का।
भूपेश बघेल ने अपनी पोस्ट में कहा, “महादेव ऑनलाइन सट्टा खुलेआम चल रहा है, लेकिन कार्रवाई नाम मात्र की है। फेसबुक जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर इसके विज्ञापन आ रहे हैं। इसे अब कौन संरक्षण दे रहा है? क्या केंद्रीय गृह मंत्री या छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री? क्या सिर्फ दिखावे के लिए किसी का फ़र्ज़ी बयान दर्ज करने भर से कार्रवाई पूरी हो जाएगी?”
उनका यह सवाल उन तमाम लोगों के लिए बड़ा झटका है, जो इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे। बघेल ने इस मामले में कार्रवाई की कमी पर नाराजगी जताई है और कहा कि जांच एजेंसियों को बिना भेदभाव और प्रभाव में आए इस पूरे मामले की छानबीन करनी चाहिए।
महादेव ऑनलाइन सट्टा एक डिजिटल बेटिंग नेटवर्क है, जहां क्रिकेट, कैसिनो और अन्य जुआ खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता है। इसका संचालन मुख्य रूप से दुबई और कुछ अन्य देशों से होता है, लेकिन भारत में हज़ारों एजेंट और पैनल ऑपरेटर सक्रिय हैं। यह नेटवर्क करोड़ों की संपत्ति हेरफेर और हवाला मनी लॉन्ड्रिंग में भी शामिल बताया जा रहा है।
महादेव सट्टा मामले की जांच छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा (EOW), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रहे हैं। ईडी ने पिछले कुछ वर्षों में इस नेटवर्क से जुड़े कई लोगों पर छापे मारे और करोड़ों रुपए की संपत्ति जब्त की। 2023 में ईडी ने दावा किया था कि यह सट्टा नेटवर्क हज़ारों करोड़ रुपए की हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त है। इस मामले में भूपेश बघेल पर भी आरोप लगाए गए थे।
हालांकि जांच जारी है, बावजूद इसके महादेव ऑनलाइन सट्टा और इसके अन्य संबंधित ऐप्स का संचालन अब भी जारी है। इस बात ने सरकार और जांच एजेंसियों की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भूपेश बघेल ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि इस प्रकार का अवैध कारोबार राजनीतिक संरक्षण के बिना इस तरह खुलेआम नहीं चल सकता।
महादेव सट्टा मामले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आरोपों से यह मामला और गरमा गया है। अब यह देखना होगा कि ED, CBI और अन्य जांच एजेंसियां इस मामले में कितनी निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करती हैं। आम जनता की उम्मीद है कि इस तरह के अवैध और भ्रष्टाचार से जुड़े नेटवर्क पर कड़ी नजर रखी जाएगी और राज्य व केंद्र सरकार दोनों जवाबदेह ठहराए जाएंगे।
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