Bhupesh Baghel: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार में महिलाओं को 7500 करोड़ रुपए बांटने के फैसले पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को सिर्फ चुनाव होने वाले राज्यों के लिए पैसा बांटने की बजाय पूरे देश के विकास और हित के बारे में सोचना चाहिए।
भूपेश बघेल ने बिहार में आयोजित कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा,“प्रधानमंत्री कल बिहार में महिलाओं को 7500 करोड़ रुपए बांटने वाले हैं। यह सिर्फ चुनावी रणनीति है, जबकि देश की जरूरतें इससे बड़ी हैं।”उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को केवल चुनावी राज्यों की नहीं, बल्कि पूरे देश के बारे में सोचना चाहिए।भूपेश बघेल ने पीएम मोदी द्वारा राजस्थान में कांग्रेस के खिलाफ दिए गए बयान की भी कड़ी निंदा की। पीएम ने कहा था कि कांग्रेस आदिवासियों के हितों की रक्षा नहीं करती, इस पर भूपेश बघेल ने जवाब देते हुए कहा,“कांग्रेस के शासनकाल में ही संविधान लागू हुआ और आदिवासियों को आरक्षण जैसे संवैधानिक अधिकार मिले। वहीं भाजपा आदिवासियों को लूटने वाली पार्टी है।”
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस की आदिवासी हितों की नीति को लेकर अपनी बात स्पष्ट की है। उनका कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा आदिवासी समुदाय के अधिकारों और संरक्षण के लिए काम किया है।उन्होंने कहा,“हमने संविधान लागू किया, आरक्षण सुनिश्चित किया और आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए योजनाएं चलाईं। भाजपा केवल वादे करती है, लेकिन उनके कार्यों में आदिवासियों का शोषण छुपा है।”
भूपेश बघेल के इस बयान से स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस भाजपा के चुनावी दांव-पेंचों को चुनौती देने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चुनावी महत्त्व बढ़ने के कारण दोनों दलों के बीच टकराव तेज हुआ है।भूपेश बघेल ने कहा कि चुनाव के नाम पर जबरदस्त पैसों का वितरण असंतुलन पैदा कर सकता है और यह देश की आर्थिक स्थिति के लिए हानिकारक है।उन्होंने सरकार से अपील की कि वह सबके लिए समान नीतियां बनाए और सिर्फ कुछ राज्यों या वर्गों को फोकस करने की बजाय समग्र विकास पर ध्यान दें।
भूपेश बघेल के इस बयान से कांग्रेस की भाजपा के खिलाफ तीखी रणनीति साफ नजर आ रही है। आदिवासियों के अधिकारों और विकास के मुद्दे पर वे भाजपा की नीतियों की जमकर आलोचना कर रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा गया है कि वह चुनावी राज्यों में धन वितरण करके राजनीतिक फायदे हासिल कर रहे हैं, जबकि देश की व्यापक जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह बयान आगामी चुनावों में राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहेगा और दोनों पार्टियों के बीच आदिवासी समुदाय समेत विभिन्न वर्गों को लेकर कड़ा संघर्ष देखने को मिलेगा।
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