अंबिकापुर @thetarget365 शहर के हृदयस्थल गांधी चौक स्थित नगर निगम के “स्वच्छता दीक्षा” भवन में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रीमियम वाइन शॉप खोले जाने का निर्णय विवादों में है। जहां एक ओर शासन इसे “राजस्व वृद्धि” और “नियंत्रित शराब वितरण” की दिशा में एक कदम बता रहा है वहीं दूसरी ओर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में इस फैसले को लेकर गहरी नाराजगी है। इस स्थान पर पहले कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार द्वारा ‘सी-मार्ट’ की स्थापना की गई थी, जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बाज़ार उपलब्ध कराना और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। अब उसी जगह पर भाजपा सरकार में प्रीमियम शराब दुकान शुरू की गई है, जिससे सरकार की प्राथमिकताओं और नीति बदलावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिस जगह पर यह वाइन शॉप खोली गई है, वह अंबिकापुर का अतिव्यस्त और प्रतिष्ठित क्षेत्र है। दुकान के करीब ही दुर्गा मंदिर, विधायक निवास, सरगुजा संभाग आयुक्त, कई न्यायाधीशों का आवास, एसपी आवास, सर्किट हाउस और जिला एवं सत्र न्यायालय जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएं मौजूद हैं। यही नहीं शराबबंदी के लिए आवाज उठाने वाले महात्मा गांधी की प्रतिमा भी सड़क के दूसरी ओर स्थापित है। इसके अलावा एक हिस्से पर मां दुर्गा शक्तिपीठ के साथ शराब दुकान के ठीक सामने एक और मंदिर है। और तो और यहां पार्किंग की भी जगह नहीं है। भीड़ बढ़ने पर इस अति संवेदनशील चौक पर व्यवस्था बिगड़नी तय है।
अब उसी भवन में प्रीमियम शराब दुकान शुरू कर देना न सिर्फ नीति में बदलाव को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि स्थानीय उत्पादों और महिला समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा से शासन का ध्यान हट रहा है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रीमियम वाइन शॉप खोलने का उद्देश्य अवैध शराब बिक्री पर नियंत्रण, राजस्व वृद्धि और शहरों में नियंत्रित वातावरण में शराब उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इन प्रीमियम दुकानों में कथित तौर पर उच्च गुणवत्ता वाली ब्रांडेड शराब, बेहतर रख-रखाव और निगरानी, तथा संवेदनशील इलाकों में कानून व्यवस्था बनाए रखने की व्यवस्था भी शामिल है। लेकिन यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या इतनी भीड़-भाड़ और संवेदनशील लोकेशन पर शराब दुकान खोलना एक जिम्मेदार और संवेदनशील निर्णय है?
सार्वजनिक स्थानों के साथ सोशल मीडिया पर स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और मंदिर समिति ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा है कि “जिस जगह पर शासन ने पहले सी-मार्ट खोलकर स्थानीय स्वावलंबन को बढ़ावा दिया, अब वहीं पर शराब दुकान खोलना युवाओं को गुमराह करने जैसा है। ये निर्णय सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद असंवेदनशील है।
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