AI Survey Voter Scam: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले ही वोटर लिस्ट में भारी फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। महोबा जिले के जैतपुर गांव में एक तीन कमरों के मकान में 4271 वोटरों का पंजीकरण पाया गया है। यह चौंकाने वाली जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जा रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सर्वेक्षण में सामने आई है। यह खुलासा चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

क्या है पूरा मामला?
जैतपुर गांव में मकान संख्या 803 के पते पर 4271 वोटर दर्ज पाए गए हैं, जबकि यह मकान महज तीन कमरों का है। इस गांव में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 16,000 है। ऐसे में अकेले एक मकान से 25% से भी अधिक वोट जुड़ना साफ तौर पर फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।

मकान मालिक से जब BLO (बूथ लेवल अधिकारी) ने संपर्क किया, तो वह भी यह सुनकर हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनके पते पर इतने सारे वोटर रजिस्टर्ड हैं और न ही वह इन लोगों को जानते हैं।
AI सर्वे ने खोली पोल
उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 को देखते हुए मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस बार तकनीक का सहारा लेते हुए AI टूल्स की मदद से वोटर डेटा की मैपिंग और पैटर्न एनालिसिस किया जा रहा है। इसी क्रम में यह बड़ा घोटाला उजागर हुआ।
AI ने सिस्टम में एक ही एड्रेस पर असामान्य संख्या में वोटर्स की मौजूदगी को चिह्नित किया और अलर्ट जारी किया। इसके बाद BLO की टीम मौके पर भेजी गई, जिससे हकीकत सामने आई।
कैसे होता है यह फर्जीवाड़ा?
चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए कुछ प्रत्याशी फर्जी वोट बनवाते हैं, जिसके तहत:
एक ही पते पर सैकड़ों-हजारों वोट दर्ज करवा दिए जाते हैं।
यह वोट आमतौर पर नकली पहचान पत्र, गलत पते और पारिवारिक सदस्यता के झूठे दावे के जरिए बनाए जाते हैं।
इन्हीं फर्जी वोटों का इस्तेमाल प्रधानी, बीडीसी मेंबर और ब्लॉक पंचायत चुनाव में किया जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे वोटर क्लस्टर को ‘वोट बैंक’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जिससे चुनावी परिणाम को प्रभावित किया जा सके।
इससे पहले भी सामने आ चुकी हैं अनियमितताएं
महोबा जिले में ही यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले एक पनवाड़ी की दुकान के पते पर 243 वोटरों का पंजीकरण पाया गया था। ऐसे कई केस पूरे प्रदेश में AI सर्वे के दौरान सामने आ रहे हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बीते कुछ हफ्तों में:
20,000 से ज्यादा फर्जी वोटरों की पहचान की जा चुकी है।
1000 से अधिक ऐसे पते मिले, जहां वोटर संख्या संदिग्ध रूप से अधिक पाई गई।
क्या कदम उठा रहा है निर्वाचन आयोग?
महोबा एडीएम कुंवर पंकज ने जानकारी दी कि सभी फर्जी पते व वोटरों की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई की जा सकती है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत:
20 सितंबर 2025 तक सभी संदिग्ध वोटरों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा।
BLO स्तर पर घर-घर जाकर जांच की जा रही है।
जिन वोटरों का सत्यापन नहीं हो पाएगा, उन्हें सूची से हटा दिया जाएगा।
क्यों है यह मामला अहम?
एक ही पते से 4271 वोटर का फर्जीवाड़ा साबित करता है कि स्थानीय निकाय चुनाव में निष्पक्षता खतरे में है।
इससे न केवल चुनावी प्रक्रिया बल्कि लोकतंत्र की नींव पर भी आघात पहुंचता है।
यह मामला चुनाव सुधारों और तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण चेतावनी है।
महोबा के जैतपुर गांव में सामने आया यह मामला चुनावी तंत्र की खामियों को उजागर करता है। हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा AI टेक्नोलॉजी के उपयोग से ऐसे फर्जीवाड़ों की समय रहते पहचान होना एक सकारात्मक पहलू है। अब देखना यह होगा कि ऐसे मामलों में कितनी सख्ती से कार्रवाई होती है और क्या आने वाले पंचायत चुनाव वास्तव में निष्पक्ष और पारदर्शी हो पाते हैं या नहीं।










