कृषि

Bihar Bamboo Subsidy: बिहार में बांस की खेती पर बंपर सब्सिडी, जानें कैसे उठाएं 60,000 की मदद

Bihar Bamboo Subsidy: आज के दौर में अगर कोई फसल वास्तव में ‘ग्रीन गोल्ड’ यानी ‘हरा सोना’ कहलाने की हकदार है, तो वह निस्संदेह बांस है। बांस केवल एक पौधा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, पर्यावरण संरक्षण करने और नए उद्योगों की नींव रखने का एक सशक्त माध्यम है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांस उत्पादक देश है, जहाँ इसकी खेती व्यावसायिक स्तर पर बड़े पैमाने पर की जाती है। हालांकि, जानकारी के अभाव में पिछले कुछ वर्षों में किसानों का रुझान इसकी ओर कम हुआ था। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने ‘राष्ट्रीय बांस मिशन’ के तहत किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए भारी सब्सिडी देने का निर्णय लिया है।

राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत 50% तक की आर्थिक सहायता

बिहार कृषि विभाग के अनुसार, राज्य सरकार बांस की खेती करने वाले किसानों की राह आसान बनाने के लिए बड़ी वित्तीय मदद दे रही है। आंकड़ों के मुताबिक, एक हेक्टेयर में बांस की खेती करने पर औसतन 1.2 लाख रुपये का खर्च आता है। बिहार सरकार इस कुल लागत पर 50 फीसदी की बंपर सब्सिडी प्रदान कर रही है। इसका अर्थ यह है कि बांस लगाने के लिए आधा पैसा, यानी लगभग 60 हजार रुपये, सीधे सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे। यह योजना न केवल निवेश के बोझ को कम करती है, बल्कि किसानों को जोखिम मुक्त खेती के लिए प्रेरित भी करती है।

बिहार के 27 चयनित जिलों में योजना का विस्तार

बिहार सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को राज्य के 27 प्रमुख जिलों में प्रभावी ढंग से लागू किया है। इन जिलों में अररिया, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, जमुई, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, शिवहर, शेखपुरा, सीतामढ़ी, सिवान, सुपौल, वैशाली और पश्चिम चंपारण शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों के पारंपरिक किसानों को बांस की खेती से जोड़कर उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है।

योजना की शर्तें: कौन और कैसे ले सकता है लाभ?

इस सरकारी सहायता का लाभ ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर दिया जाएगा। योजना की खास बात यह है कि एक ही परिवार के पति और पत्नी दोनों इसके पात्र हो सकते हैं, बशर्ते उनके नाम पर अलग-अलग जमीन के स्वामित्व प्रमाण पत्र (LPC) हों। घने बांस लगाने के लिए न्यूनतम 0.04 हेक्टेयर से अधिकतम 0.2 हेक्टेयर तक की सीमा निर्धारित की गई है। साथ ही, खेत की मेड़ पर हर किसान को कम से कम 10 पौधे लगाना अनिवार्य है। यह नियम छोटे और सीमांत किसानों को भी योजना के दायरे में लाता है।

आवेदन की ऑनलाइन प्रक्रिया और आवश्यक कदम

इच्छुक किसान इस योजना के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए बिहार उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाना होगा। वेबसाइट पर ‘राष्ट्रीय बांस मिशन योजना’ के लिंक पर क्लिक करके अपनी व्यक्तिगत और भूमि संबंधी जानकारी दर्ज करनी होगी। दस्तावेजों को अपलोड करने के बाद जिला स्तर पर विभागीय टीम द्वारा भौतिक सत्यापन और जांच की जाएगी। पात्रता की पुष्टि होने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में हस्तांतरित कर दी जाएगी। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने जिले के कृषि या बागवानी कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।

बांस की खेती ही क्यों? जानें इसके बेमिसाल फायदे

बांस की खेती अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में काफी सरल और किफायती है। इसे न तो बहुत अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है और न ही महंगे रासायनिक खादों की। यह फसल बंजर और कम उपजाऊ भूमि में भी लहलहा सकती है और मौसम की मार झेलने में सक्षम है। रोपण के 3 से 5 साल के भीतर यह तैयार हो जाती है और एक बार तैयार होने के बाद कई वर्षों तक निरंतर आय का स्रोत बनी रहती है। औद्योगिक क्षेत्र में इसकी बढ़ती मांग की वजह से बाजार में इसका बहुत अच्छा मूल्य मिलता है, जो किसानों के सुनहरे भविष्य की गारंटी है।

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