Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर सीट शेयरिंग को लेकर महागठबंधन और एनडीए दोनों ही गठबंधन में अभी भी सहमति नहीं बन पाई है। जहां एनडीए में जीतनराम मांझी और चिराग पासवान की सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है, वहीं महागठबंधन में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी को लेकर घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व मुकेश सहनी के व्यवहार से नाराज है और उन्होंने आरजेडी के नेतृत्व को कड़ा संदेश भी दिया है।

कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व की नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व ने मुकेश सहनी के बार-बार मीडिया में डिप्टी मुख्यमंत्री पद की मांग को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि चुनाव से पहले न तो मुख्यमंत्री पद का कोई फेस तय होगा और न ही डिप्टी सीएम का। प्रदेश कांग्रेस ने आरजेडी से कहा है कि मुकेश सहनी को किसी भी हालत में काबू में रखा जाए, नहीं तो यह गठबंधन के लिए नुकसानदेह होगा।

तेजस्वी यादव की पहल और बैठक
कांग्रेस की नाराजगी को देखते हुए महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को दिल्ली जाने वाली अपनी फ्लाइट कैंसिल कर दी। सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी ने मुकेश सहनी के साथ अपने सरकारी आवास 1 पोलो रोड पर करीब दो घंटे तक बैठक की। यह बैठक बंद कमरे में हुई, जिसमें तेजस्वी ने सहनी को कांग्रेस के रुख से अवगत कराया और मीडिया में डिप्टी सीएम पद की दावेदारी पर बोलने से मना किया।
महागठबंधन की राजनीति में बड़ा झटका?
मुकेश सहनी की लगातार डिप्टी सीएम पद की मांग और कांग्रेस की नाराजगी महागठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर रही है। बिहार चुनाव 2025 के लिए गठबंधन की ताकत तभी बरकरार रहेगी जब सभी पार्टियां मिलकर सामंजस्य स्थापित करें। इस मसले को लेकर आरजेडी को कांग्रेस के साथ तालमेल बनाकर चलना होगा, नहीं तो बिहार में विपक्षी दलों की स्थिति कमजोर हो सकती है।
आगे क्या होगा?
महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेतृत्व के बीच समन्वय की जरूरत स्पष्ट हो चुकी है। यह देखना होगा कि आगामी दिनों में मुकेश सहनी की मांगों को किस तरह संतुलित किया जाता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस विवाद का समाधान महागठबंधन की जीत की कुंजी साबित हो सकता है।
बिहार चुनाव 2025 की राजनीति में महागठबंधन के लिए मुकेश सहनी का मुद्दा एक चुनौती बनकर सामने आया है। कांग्रेस की नाराजगी और तेजस्वी यादव के प्रयास गठबंधन की मजबूती के लिए जरूरी हैं। आने वाले दिनों में सीट शेयरिंग को लेकर इन मतभेदों का समाधान महागठबंधन की सफलता या असफलता तय करेगा।










