Bihar elections 2025 : बिहार में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार घोषणाएं कर रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाला महागठबंधन भी अगस्त में ‘अगस्त क्रांति’ के जरिए बड़ा चुनावी अभियान शुरू करने जा रहा है। विपक्षी गठबंधन INDIA ने इस बाबत रणनीति तैयार कर ली है, जिसमें राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जैसे बड़े नेता जनसभाएं करेंगे।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने घोषणा की है कि रक्षाबंधन (9 अगस्त) के बाद वे खुद सड़कों पर उतरकर राज्य के नौ मंडलों में रैलियां करेंगे। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ियों के चलते लोगों के मताधिकार पर खतरा है। साथ ही, राज्य में अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है—पिछले 10 दिनों में 100 हत्याएं हो चुकी हैं।
तेजस्वी यादव की इस पहल को कांग्रेस सहित अन्य सहयोगी दलों का समर्थन भी मिल रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि अगस्त का महीना ऐतिहासिक क्रांतियों का प्रतीक रहा है और यही समय जनता की लड़ाई लड़ने का है। विपक्ष इसे जन-जागरण का अवसर मानकर नीतीश सरकार के खिलाफ माहौल बना रहा है।
महागठबंधन द्वारा ‘अगस्त क्रांति’ शब्द का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। 1942 में इसी महीने महात्मा गांधी के नेतृत्व में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू हुआ था। विपक्ष मानता है कि इस ऐतिहासिक संदर्भ से जनता को जोड़कर जनभावनाओं को सरकार के खिलाफ मोड़ा जा सकता है।
विपक्ष राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बढ़ती हत्याएं, बिजली की कमी, प्रशासनिक कुप्रबंधन और बेरोजगारी को चुनावी मुद्दा बना रहा है। एक समय ‘सुशासन बाबू’ कहे जाने वाले नीतीश कुमार अब विरोधियों के निशाने पर हैं और ‘अगस्त क्रांति’ इसी विरोध को संगठित रूप देने की कोशिश है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्ष के हमलों को बेअसर करने के लिए लगातार लोकलुभावन घोषणाएं कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 कर दिया और ममता कार्यकर्ताओं को हर डिलिवरी पर ₹600 देने की घोषणा की। इसके अलावा मधुबनी में ₹650 करोड़ की परियोजनाएं और पत्रकारों की पेंशन ₹15,000 करने जैसी घोषणाएं की गई हैं।
पिछले कुछ महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह बार बिहार का दौरा कर चुके हैं। एनडीए पूरी तैयारी में है, जबकि महागठबंधन अगस्त से मैदान में उतरने को तैयार है। अब देखना यह है कि क्या ‘अगस्त क्रांति’ महागठबंधन के लिए वोटों की क्रांति बन पाएगी या फिर नीतीश कुमार की घोषणाएं और मोदी का चेहरा एक बार फिर उन्हें सत्ता में वापसी दिलाएगा।
अक्टूबर-नवंबर में संभावित चुनाव से पहले बिहार में सियासी टकराव चरम पर पहुंचता जा रहा है। जनता की नजर अब इस पर है कि कौन सा पक्ष उसकी भावनाओं और जरूरतों को सही से समझ पाता है।
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