US Iran Tension
US Iran Tension : वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ता कूटनीतिक गतिरोध एक बार फिर चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति अपने सख्त तेवरों को दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि तेहरान ने अब तक अपने कार्यों के लिए उचित कीमत नहीं चुकाई है। ट्रंप के हालिया बयानों ने मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों पर सवालिया निशान लगा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को मीडिया से चर्चा के दौरान संकेत दिया कि ईरान की ओर से पेश किए गए किसी भी नए शांति प्रस्ताव को स्वीकार करना वर्तमान परिस्थितियों में उनके लिए काफी कठिन होगा। उन्होंने कहा कि वह जिस प्रस्ताव की समीक्षा करने जा रहे हैं, उसके स्वीकार्य होने की संभावना उन्हें बहुत कम नजर आती है। ट्रंप के इस रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका अब ईरान पर पहले से कहीं अधिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
दूसरी ओर, ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन का मानना है कि अमेरिका के पास फैसले लेने की गुंजाइश अब बहुत सीमित रह गई है। विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि दोनों पक्षों के ये बयान किसी कूटनीतिक समाधान के बजाय एक लंबे गतिरोध की ओर इशारा करते हैं, जिससे आने वाले समय में सैन्य और आर्थिक मोर्चों पर तनाव और अधिक गंभीर हो सकता है।
ईरान की अर्ध-सरकारी ‘नूर न्यूज एजेंसी’ के अनुसार, तेहरान ने एक 14 सूत्री प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें केवल युद्धविराम की अवधि बढ़ाने के बजाय सीधे युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने का आह्वान किया गया है। यह प्रस्ताव अमेरिका की नौ सूत्री योजना के जवाब में पेश किया गया है। इसमें ईरान ने स्पष्ट मांग रखी है कि अमेरिका उस पर लगे सभी कड़े प्रतिबंधों को हटाए, नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करे और इस क्षेत्र से अपनी सेनाओं को वापस बुलाए। साथ ही, लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियानों को रोकने की भी शर्त रखी गई है।
दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने अपना यह जवाब पाकिस्तानी मध्यस्थ के जरिए वाशिंगटन तक पहुंचाया है। पाकिस्तान इससे पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच सीधी वार्ता की मेजबानी कर चुका है। इसके साथ ही, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी से संपर्क साधा है। ओमान लंबे समय से इन दोनों देशों के बीच वार्ता में एक निष्पक्ष पर्यवेक्षक की भूमिका निभाता रहा है।
इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील बिंदु ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की योजना पेश की है, जहां से दुनिया के तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता है। हालांकि, ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने रविवार को दोटूक शब्दों में कहा कि ईरान अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने दावा किया कि “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” पूरी तरह से ईरान का है और ट्रंप की नाकेबंदी की योजना कभी सफल नहीं होगी।
निकजाद ने यह भी कहा कि ईरान युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए व्यवसायों और संपत्तियों की भरपाई के लिए आंतरिक स्तर पर काम कर रहा है। ट्रंप की सख्त नीतियों और ईरान की अड़िगता ने इस क्षेत्र में एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जहां शांति वार्ता की संभावना फिलहाल धूमिल दिखाई दे रही है। वैश्विक बाजार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति इस युद्ध जैसी स्थिति को टाल पाएगी या तनाव एक नए संकट को जन्म देगा।
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