Bihar Elections 2025: जैसे-जैसे बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 करीब आ रहा है, वैसे-वैसे सियासी गर्मी भी बढ़ती जा रही है। विपक्ष ने एक बार फिर सत्तारूढ़ एनडीए सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलना तेज कर दिया है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपनी ‘बिहार अधिकार यात्रा’ के दौरान सरकार पर जमकर निशाना साधा और ‘चूहे बनाम भ्रष्टाचार’ का मुद्दा उठाकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

तेजस्वी का तंज – चूहों ने पी ली 9 लाख लीटर शराब
तेजस्वी यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में सरकार को घेरते हुए कहा:

“20 वर्षों की भ्रष्ट मोदी-नीतीश सरकार ने अपने आधिकारिक बयानों में भ्रष्टाचार की असफलता का ठीकरा चूहों पर फोड़ा है। बिहार के चूहों ने:
थानों में रखी 9,00,000 लीटर शराब गटक ली।
1100 करोड़ के बांध को कुतर दिया।
7,819 करोड़ की लागत वाले 113 पुल-पुलियों को नुकसान पहुंचाया।
एनएमसीएच में नवजात की अंगुली और शव की आंख तक खा ली।
बाढ़ राहत सामग्री भी चट कर गए।”
तेजस्वी ने ये उदाहरण पेश कर यह दिखाने की कोशिश की कि सरकार अपनी विफलताओं और भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही से बचने के लिए ‘चूहों’ को दोषी ठहरा रही है।
‘सुशासन बाबू’ पर कसा तंज
तेजस्वी ने कहा कि नीतीश कुमार, जिन्हें कभी ‘सुशासन बाबू’ कहा जाता था, उनकी सरकार अब बदहाली और बहानेबाजी की मिसाल बन चुकी है। उन्होंने सवाल किया कि कब तक बिहार की जनता इन विफलताओं का बोझ उठाती रहेगी?“जब-जब असली भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, तब-तब सरकार चूहों का हवाला देकर खुद को बचाने में लगी रहती है।”
एनडीए की बढ़ी मुश्किलें?
तेजस्वी यादव का यह हमला ऐसे वक्त आया है जब बिहार चुनाव की तैयारी जोरों पर है। उनके द्वारा उठाए गए ये मुद्दे सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहे हैं, और इसे सरकार पर एक प्रभावी तंज के रूप में देखा जा रहा है। जहां समर्थक तेजस्वी की राजनीतिक चतुराई की सराहना कर रहे हैं, वहीं एनडीए खेमे के नेता इसे चुनावी नाटक बता रहे हैं।
चूहे और भ्रष्टाचार: एक बार फिर चुनावी मुद्दा
बिहार में ‘चूहों’ का बहाना कोई नया नहीं है। बीते वर्षों में कई रिपोर्ट्स और सरकारी बयानों में शराब, अनाज, बिजली के तार, अस्पताल उपकरण और यहां तक कि सरकारी फाइलों के नुकसान का कारण चूहों को बताया गया। अब तेजस्वी ने इन घटनाओं को एक साथ जोड़कर, उन्हें चुनावी हथियार बना लिया है।
बिहार चुनाव 2025 की रणभेरी बज चुकी है, और राजनीतिक बयानबाज़ी नए रूप में सामने आ रही है। तेजस्वी यादव का ‘चूहों’ पर आधारित यह हमला निश्चित रूप से जनमानस को आकर्षित करने की कोशिश है। अब देखना यह है कि जनता इसे हास्य और व्यंग्य के रूप में लेती है या एक गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप के रूप में।










