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Bihar Elections 2025 : नीतीश के ‘भरोसेमंद’ महिला वोटरों पर तेजस्वी का बड़ा दांव, क्या आरजेडी की ‘लेडी ब्रिगेड’ पलटेगी बाजी?

Bihar Elections 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे मजबूत वोट बैंक—महिला मतदाताओं—पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बड़ा दांव खेला है। नीतीश कुमार ने जहां छात्राओं को साइकिल वितरण और शराबबंदी जैसी योजनाओं से महिलाओं का भरोसा जीता है, वहीं तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने उन्हें झटका देने के लिए चुनावी मैदान में सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवारों को उतार दिया है।बिहार की राजनीति में महिलाओं की बढ़ती मतदान भागीदारी, लोकतंत्र में उनकी गहरी रुचि का प्रतीक है। ऐसे में, महिला उम्मीदवारों को कम तरजीह देना कहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) को भारी न पड़ जाए?

RJD ने उतारी सबसे बड़ी ‘लेडी ब्रिगेड’

आरजेडी ने इस बार 143 सीटों से उम्मीदवार घोषित किए हैं और समाज के सभी वर्गों को साधने की कोशिश की है। इसी क्रम में, तेजस्वी यादव ने 24 महिला कैंडिडेट्स को टिकट दिया है। अन्य किसी भी प्रमुख पार्टी ने इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को मैदान में नहीं उतारा है।

वहीं, एनडीए गठबंधन की प्रमुख पार्टियां बीजेपी और जेडीयू दोनों ने 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए केवल 13-13 महिलाओं को ही टिकट दिए हैं। एनडीए की तीसरी सहयोगी लोजपा (रामविलास) ने 29 सीटों में 6 महिलाओं को टिकट दिया है।

महागठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी, कांग्रेस ने तो 60 सीटों में सिर्फ पांच महिला उम्मीदवारों (10% से भी कम) पर दांव लगाया है, जबकि आरजेडी ने लगभग 17% टिकट महिलाओं को दिए हैं। संख्याबल में आरजेडी का यह कदम राजनीतिक पंडितों का ध्यान खींच रहा है।

नीतीश का पारंपरिक महिला वोट बैंक

नीतीश कुमार 2005 में सत्ता में आने के बाद से ही महिला सशक्तीकरण की योजनाओं पर जोर देते रहे हैं। छात्राओं को साइकिल योजना, सरकारी नौकरियों में आरक्षण और सबसे महत्वपूर्ण, शराबबंदी को लागू करने से महिलाओं का एक बड़ा वर्ग उनका भरोसेमंद वोटर बन गया है।

चुनाव से ठीक पहले नीतीश सरकार ने महिलाओं के खातों में ₹10,000 ट्रांसफर कर एक बार फिर अपनी ‘माताओं-बहनों’ के साथ खड़े रहने का संदेश दिया है।

तेजस्वी का दोतरफा ‘माई-बहिन’ दांव

तेजस्वी यादव अच्छी तरह समझते हैं कि महिलाओं को अपने पाले में लाए बिना सत्ता पाना असंभव है। नीतीश के इस मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए उन्होंने दो प्रमुख दांव खेले हैं:

अधिक महिला प्रत्याशी: 24 महिला कैंडिडेट को टिकट देकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि आरजेडी महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को गंभीरता से लेती है।

सीधा आर्थिक लाभ का वादा: तेजस्वी ने ‘माई-बहिन’ योजना के तहत हर महिला को सालाना ₹2,500 देने का वादा किया है। इसके अलावा, उन्होंने नीतीश की ₹10,000 ट्रांसफर योजना के मुकाबले, हर महिला के खाते में पूरे साल का एकमुश्त ₹30,000 एडवांस ट्रांसफर करने का वादा कर एक बड़ा चुनावी वादा किया है।

आरजेडी की लिस्ट सामाजिक समीकरणों (52 यादव, 18 मुस्लिम, 16 अगड़ी जाति) को साधने में भी सफल रही है, लेकिन 24 महिला उम्मीदवारों का यह दांव क्या नीतीश कुमार के सालों के प्रयास से बनाए गए महिला वोट बैंक में सेंध लगा पाएगा? इसका फैसला 23 अक्टूबर के नामांकन वापसी के बाद और फिर चुनाव परिणामों के बाद ही हो पाएगा।

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