Bihar politics : बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान में अभी वक्त है, लेकिन राजनीतिक प्रेशर पॉलिटिक्स का खेल पहले से ही शुरू हो चुका है। हाल ही में महागठबंधन और एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर बवाल मच चुका है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP), जो महागठबंधन का हिस्सा रही है, ने दावा किया कि वह इस बार 60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। यह दावे के साथ सवाल उठने लगे हैं कि क्या राष्ट्रीय जनता दल (RJD) 60 सीटों की पेशकश कर पाएगा, जबकि उसे कांग्रेस के लिए भी अधिक सीटें देने में मुश्किल हो रही है?
2020 के विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर विकासशील इंसान पार्टी और आरजेडी के बीच मतभेद थे। अब मुकेश सहनी, जो एक बार फिर महागठबंधन का हिस्सा हैं, ने इस बार 60 सीटों पर चुनाव लड़े जाने की घोषणा की है। इस ऐलान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या आरजेडी, जो कांग्रेस और अन्य छोटे दलों के बीच सीटों को लेकर जूझ रही है, इतनी बड़ी संख्या में सीटें VIP को दे पाएगी?
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में 60 सीटों का दावा करना VIP के लिए काफी बड़ा कदम है। इसके अलावा, सहनी ने यह भी ऐलान किया कि बिहार का अगला उपमुख्यमंत्री मल्लाह समाज से होगा, जिससे यह भी संकेत मिल रहा है कि वह खुद को इस पद का दावेदार मान रहे हैं।
महागठबंधन में शामिल अन्य दलों की भी अपनी-अपनी मांगें हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) बिहार में कम से कम 12 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है। पशुपति पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) ने पहले सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़े जाने का ऐलान किया था और अब महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ने का मन बना लिया है, जिससे यह पार्टी भी अपनी दावेदारी बढ़ा सकती है। तीनों वाम दल भी अपने लिए 40 सीटों की मांग कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस को 50 से 55 सीटें देने के लिए आरजेडी तैयार नहीं है।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच भी सीटों को लेकर घमासान छिड़ा हुआ है। आरजेडी इस बार 140 से 145 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, जबकि कांग्रेस को केवल 50-55 सीटें देने के मूड में है। कांग्रेस, जो पिछले लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को आधार मानते हुए 70 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, आरजेडी के लिए यह स्वीकार्य नहीं है।
2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के 5 दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। आरजेडी ने 144 सीटों में से 75, कांग्रेस ने 70 सीटों में से 19, और वाम दलों ने मिलकर 29 सीटों में से 16 सीटें जीती थीं। वहीं, मुकेश सहनी की पार्टी ने महागठबंधन में रहते हुए 25 सीटों की मांग की थी, लेकिन सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनी। इसके चलते उनकी पार्टी महागठबंधन से बाहर हो गई और VIP ने एनडीए का दामन थाम लिया, जहां बीजेपी ने उन्हें 11 सीटें दी, जिनमें से 4 सीटों पर उनकी पार्टी को जीत मिली।
अब मुकेश सहनी एक बार फिर महागठबंधन में लौटे हैं और इस बार उनकी सीटों की मांग 25 से बढ़कर 60 हो गई है। उन्होंने साफ किया है कि वे 60 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और उपमुख्यमंत्री का पद भी चाहते हैं। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि बिहार का अगला उपमुख्यमंत्री मल्लाह समाज से होना चाहिए, जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत हो गई है।
यह देखा जाएगा कि क्या इस बार फिर से महागठबंधन में सीटों को लेकर वही स्थिति पैदा होती है, जैसे 2020 में हुई थी, और क्या महागठबंधन के दोनों बड़े दल—आरजेडी और कांग्रेस—मुकेश सहनी की भारी मांग को स्वीकार करेंगे या फिर गठबंधन टूटने की स्थिति उत्पन्न होगी।
अगले चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर महागठबंधन के लिए समझौता करना एक बड़ी चुनौती होगी। यदि सहनी की मांग पूरी नहीं होती है तो यह संभावना भी बनती है कि महागठबंधन फिर से टूट जाएगा, जैसा कि पिछली बार हुआ था। ऐसे में यह देखना होगा कि तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के बीच इस बार क्या समझौता होता है या फिर कोई नया राजनीतिक मोड़ आता है।
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