Chhattisgarh Congress
Chhattisgarh Congress : छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सांगठनिक फेरबदल और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने अब जोर पकड़ लिया है। प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट इन दिनों रायपुर के दौरे पर हैं, जहां वे पार्टी की जड़ों को मजबूत करने के लिए मैराथन बैठकों का दौर चला रहे हैं। इन बैठकों का मुख्य केंद्र बिंदु विधायकों की कार्यप्रणाली, उनके विधानसभा क्षेत्रों की जमीनी हकीकत और संगठन में नई जान फूंकना है। इस महत्वपूर्ण कवायद में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत भी प्रमुखता से शामिल हैं।
सचिन पायलट ने एक नई कार्यशैली अपनाते हुए हर विधायक के साथ व्यक्तिगत रूप से चर्चा करने की रणनीति बनाई है। प्रत्येक विधायक को लगभग 15 मिनट का समय दिया जा रहा है, जिसमें पायलट उनसे ‘वन-टू-वन’ बात कर रहे हैं। इस दौरान वे न केवल विधायक के क्षेत्र की ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ ले रहे हैं, बल्कि संगठन की वर्तमान स्थिति पर भी फीडबैक मांग रहे हैं। हालांकि चुनाव में अभी लगभग ढाई साल का समय शेष है, लेकिन पार्टी ने अभी से ही विधायकों का परफॉर्मेंस आधारित रिपोर्ट कार्ड तैयार करना शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य की टिकट वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और ठोस बनाया जा सके।
विधायकों के साथ चर्चा का सिलसिला समाप्त होने के बाद सचिन पायलट का अगला लक्ष्य संगठन की निचली कड़ियां हैं। वे नवनियुक्त जिलाध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों के साथ भी विस्तृत बैठक करेंगे। इस रणनीति के पीछे पायलट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी का जमीनी ढांचा पूरी तरह सक्रिय रहे। ब्लॉक और जिला स्तर पर होने वाली इन बैठकों के जरिए कांग्रेस आलाकमान यह आकलन करना चाहता है कि सरकार की नीतियों के खिलाफ जनमानस में क्या माहौल है और पार्टी कार्यकर्ता किस स्तर तक जनता से जुड़े हुए हैं।
बैठक के दौरान महिला सशक्तिकरण और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिल पर भी गहन मंथन हुआ। कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने इस विषय पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि पार्टी आरक्षण के विरोध में नहीं है, लेकिन केंद्र द्वारा पेश किए गए बिल की पेचीदगियों और उससे जुड़े भ्रम को दूर करना अनिवार्य है। पायलट ने विधायकों से चर्चा की कि क्या पार्टी के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं को इस बिल की सही जानकारी है? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाकर इस मुद्दे पर सही संदेश और पार्टी का पक्ष मजबूती से रखना चाहिए।
संगठन में पदों के फेरबदल के बीच महिला कांग्रेस अध्यक्ष का पद चर्चा का विषय बना हुआ है। विधायक संगीता सिन्हा की दावेदारी इस पद के लिए सबसे मजबूत मानी जा रही है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पार्टी की एक निष्ठावान कार्यकर्ता हैं और नेतृत्व उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपेगा, वे उसे स्वीकार करेंगी। वर्तमान में पायलट की इन बैठकों को महिला विंग में नई ऊर्जा भरने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
सचिन पायलट का पिछला दौरा 17 मार्च को हुआ था, जब उन्होंने विधानसभा घेराव के माध्यम से राजधानी रायपुर में एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया था। उस समय हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था। पिछले दौरे में जहां फोकस ‘भारी भीड़’ और ‘शक्ति प्रदर्शन’ पर था, वहीं इस बार पायलट का पूरा ध्यान ‘सूक्ष्म प्रबंधन’ (Micro-management) और व्यक्तिगत संवाद पर है। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पार्टी का हर सिपाही चुनावी मोड में आ जाए और आपसी समन्वय के साथ आगे बढ़े।
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