Bihar Bulldozer Politics
Bihar Bulldozer Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों ‘बुलडोजर’ और ‘अतिक्रमण’ को लेकर सरगर्मी तेज है. सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार (26 अप्रैल, 2026) को मुंगेर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि सरकारी जमीन पर किए गए किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यदि सरकारी भूमि पर घर बना है, तो उसे ध्वस्त होना ही होगा और इसमें कोई भी हस्तक्षेप काम नहीं आएगा. मुख्यमंत्री के इस बयान ने उन हजारों परिवारों के बीच हड़कंप मचा दिया है जो दशकों से ऐसी जमीनों पर बसे हुए हैं. सरकार का तर्क है कि विकास कार्यों को गति देने के लिए अवैध कब्जों को हटाना अनिवार्य है.
मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख पर एनडीए के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को अपनी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी. पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान चिराग ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन मानवीय पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. चिराग ने सुझाव दिया कि सरकार को किसी भी गरीब का आशियाना तोड़ने से पहले उनके रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्रवाई ऐसी हो जिससे किसी जरूरतमंद परिवार के साथ अन्याय न हो और उनके जायज अधिकारों की रक्षा की जा सके.
चिराग पासवान ने स्वीकार किया कि कई बार अवैध अतिक्रमण विकास की राह में बड़ा गतिरोधक साबित होता है. सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण के लिए जमीन खाली कराना प्रशासन की मजबूरी हो जाती है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “हम हमेशा इस बात के पक्षधर रहे हैं कि किसी का घर उजाड़ने से पहले उन्हें दूसरी जगह मुहैया कराई जाए. उचित कार्रवाई तभी की जानी चाहिए जब गरीब परिवार के पास सिर छुपाने की कोई और जगह हो.” चिराग का यह बयान नीतीश-सम्राट सरकार की कार्यशैली पर एक सहयोगी दल की ओर से दी गई रचनात्मक सलाह के रूप में देखा जा रहा है.
पत्रकारों ने जब चिराग पासवान से राज्य में लागू शराबबंदी कानून की विफलता और इसके 10 साल पूरे होने पर सवाल किया, तो उन्होंने कानून की कमियों को स्वीकार किया. चिराग ने कहा कि यकीनन पिछले एक दशक में पूर्ण शराबबंदी सफल नजर नहीं आ रही है. आए दिन जहरीली शराब से होने वाली मौतें और सीमावर्ती इलाकों से शराब की तस्करी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. उन्होंने कहा कि सरकार को इन त्रुटियों को पहचानकर उन्हें दुरुस्त करने की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान स्थिति में कानून के कार्यान्वयन में कई खामियां दिखाई दे रही हैं.
हालांकि चिराग ने कानून की मंशा का बचाव भी किया. उन्होंने कहा, “शराबबंदी के पीछे की सोच गलत नहीं है, क्योंकि शराब ने अनगिनत परिवारों को बर्बाद किया है. लेकिन सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं है, उसे धरातल पर प्रभावी बनाना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है.” चिराग ने आश्वासन दिया कि कानून में जहां भी कमियां हैं, उन्हें आने वाले समय में दुरुस्त किया जाएगा ताकि जहरीली शराब जैसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके. बिहार की राजनीति में चिराग पासवान का यह बयान एक तरफ सरकार के साथ खड़े दिखने और दूसरी तरफ जनता की समस्याओं को उठाने की उनकी ‘बैलेंसिंग एक्ट’ रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
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