Bihar voter list update : बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का पहला मसौदा प्रकाशित कर दिया है। इस सूची के अनुसार राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या अब घटकर 7.24 करोड़ रह गई है, जो पहले 7.89 करोड़ थी। यानी इस बार करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। आयोग द्वारा यह प्रक्रिया मतदाता सूची पुनरीक्षण (रिवीजन) के पहले चरण के तहत की गई है।
मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया सबसे ज्यादा चर्चा का विषय तब बनी जब किशनगंज जिले में 1 लाख 45 हजार 913 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इसी तरह सहरसा जिले में 1 लाख 31 हजार 596 लोगों के नाम गायब पाए गए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि कई जिलों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है।
इस बार की सूची में भागलपुर जिले में सर्वाधिक 2 लाख 44 हजार 612 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह राज्य में सबसे बड़ी संख्या है। इसके अलावा सारण जिले में 2 लाख 73 हजार, पश्चिमी चंपारण में 1 लाख 91 हजार 376, और सुपौल में 1 लाख 28 हजार 207 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि बिहार के कई प्रमुख जिलों में यह बदलाव बहुत व्यापक स्तर पर हुआ है।
छोटे जिलों में भी यह सूचीबद्ध कटौती देखने को मिली है। खगड़िया जिले में 79 हजार 551, बक्सर में 87 हजार 645, और शेखपुरा जिले में 26 हजार 256 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इन जिलों में भी यह बदलाव स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हट गए हैं या जिनका नाम पहले कभी जोड़ा नहीं गया, वे 2 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के तहत आयोग विशेष कैंपों का आयोजन करेगा जहां लोग अपने दस्तावेजों के साथ जाकर आवेदन कर सकेंगे।
नाम जोड़ने के लिए विशेष कैंप प्रत्येक प्रखंड सह अंचल कार्यालय, नगर निकाय कार्यालय, नगर परिषद और नगर निगम कार्यालय में लगाए जाएंगे। इन कैंपों में चुनाव आयोग के कर्मचारी सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उपस्थित रहेंगे। यह व्यवस्था रविवार को भी लागू रहेगी, जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
आयोग ने बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को निर्देश दिया है कि वे दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के घर जाकर उनका आवेदन स्वीकार करें ताकि वे बिना परेशानी के मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकें। यह एक सराहनीय पहल मानी जा रही है जो चुनाव प्रक्रिया को अधिक समावेशी और आसान बनाएगी।
वोटर लिस्ट में इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने को लेकर बिहार की राजनीति में भी हलचल मच गई है। कई राजनीतिक दलों ने इस पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। खासकर सीमावर्ती जिलों में जहां जनसंख्या घनत्व अधिक है, वहां इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में से नाम हटाने की यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमबद्ध और डेटा आधारित है। जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, स्थानांतरित हो चुके हैं या जिनके विवरण अधूरे या फर्जी पाए गए हैं, उनके नाम सूची से हटाए गए हैं। आयोग का दावा है कि यह प्रक्रिया निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की गई है।
इन बड़े बदलावों के साथ बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की नींव रखी जा रही है। चुनाव आयोग की ओर से आगे भी मतदाता सूची का अद्यतन जारी रहेगा। आयोग ने जनता से अपील की है कि वे समय रहते अपने नाम की स्थिति जांचें और जरूरत पड़ने पर नाम जुड़वाएं, ताकि चुनाव के समय किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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