Bijapur Naxal surrender
Bijapur Naxal surrender: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। लंबे समय से हिंसा के रास्ते पर चल रहे 12 माओवादियों ने अंततः हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया है। गुरुवार को इन नक्सलियों ने आधिकारिक रूप से सुरक्षाबल के जवानों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह सफलता राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे ‘पूना मारगेम’ (नई सुबह) अभियान के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों ने स्वीकार किया कि वे खोखली विचारधारा और हिंसा की राह से थक चुके थे और अब एक शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं।
पुलिस अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन 12 माओवादी कैडरों की प्रोफाइल काफी हाई-प्रोफाइल थी। इन सभी पर कुल मिलाकर 54 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जो इनकी सक्रियता और संगठन में ऊंचे पद को दर्शाता है। समर्पण के दौरान नक्सलियों ने केवल खुद को पुलिस के हवाले नहीं किया, बल्कि अपने साथ AK-47, SLR रायफल और भारी मात्रा में कारतूस भी जमा कराए। ये सभी माओवादी मुख्य रूप से ‘साउथ सब जोनल ब्यूरो’ से संबद्ध थे, जिसे नक्सली नेटवर्क का एक बेहद सक्रिय हिस्सा माना जाता है। इन आधुनिक हथियारों का समर्पण सुरक्षाबलों के लिए सामरिक दृष्टि से एक बड़ी जीत है।
अधिकारियों ने बीजापुर जिले में जारी अभियान की सफलता के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 1 जनवरी 2024 से अब तक का समय नक्सल उन्मूलन के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ है। इस अवधि के दौरान अब तक 888 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। इसके अतिरिक्त, सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए 1163 माओवादियों को गिरफ्तार किया है, जबकि विभिन्न मुठभेड़ों में 231 माओवादी मारे गए हैं। यह राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद एवं विकास (T-R-D मॉडल) पर आधारित सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि बस्तर के सुदूर अंचलों में अब बदलाव की बयार बह रही है।
इस विशेष आत्मसमर्पण की एक उल्लेखनीय कड़ी यह है कि इसमें 8 महिला कैडर और 4 पुरुष माओवादी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि नक्सली संगठनों के भीतर महिलाओं का भी अब मोहभंग हो रहा है। राज्य सरकार की पुनर्वास प्रक्रिया के तहत, इन सभी को समाज में फिर से स्थापित करने के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं। प्रत्येक कैडर को प्रोत्साहन स्वरूप 50,000 रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। सरकार का लक्ष्य इन पूर्व माओवादियों को कौशल विकास और अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें स्वावलंबी बनाना है, ताकि वे भविष्य में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने इस मौके पर अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी हथियार डालने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि “माओवादी भ्रामक और हिंसक विचारधाराओं को पूरी तरह त्याग दें और निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें।” एसपी ने जोर देकर कहा कि शासन की ‘पूना मारगेम’ नीति केवल एक कागजी योजना नहीं है, बल्कि यह भटके हुए युवाओं के भविष्य को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वावलंबी बनाने के लिए हर संभव सुविधा प्रदान करने का एक ठोस मार्ग है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो भी नक्सली शांति का रास्ता चुनेगा, प्रशासन उसका पूरा सहयोग करेगा।
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