JP Nadda attack on Kharge
JP Nadda attack on Kharge: संसद के बजट सत्र 2026 के सातवें दिन राज्यसभा में अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिले। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। विवाद की जड़ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर न दिए जाने का मुद्दा रहा। सदन के भीतर का वातावरण इतना तनावपूर्ण हो गया कि सामान्य विधायी कामकाज प्रभावित हुआ। इस दौरान दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेताओं ने एक-दूसरे पर संसदीय मर्यादाओं के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए, जिससे सदन की गरिमा पर सवाल खड़े होने लगे।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मोर्चा संभालते हुए लोकसभा की हालिया घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। खरगे ने तर्क दिया कि संसद केवल एक सदन से नहीं बल्कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों के समन्वय से बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि निचले सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी राष्ट्रहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया। खरगे ने सभापति से सवाल किया कि यदि लोकतंत्र के मंदिर में विपक्ष के मुख्य चेहरे को ही बोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी, तो संसदीय लोकतंत्र के अस्तित्व का क्या होगा?
विपक्ष के आरोपों पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने खरगे को संबोधित करते हुए कहा कि एक अनुभवी राजनेता को यह शोभा नहीं देता कि वह एक सदन की कार्यवाही का मुद्दा दूसरे सदन में उठाए। नड्डा ने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘अबोध बालक’ करार दिया और खरगे को नसीहत दी कि वे पूरी कांग्रेस पार्टी को एक व्यक्ति के अहंकार का बंधक न बनने दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अध्यक्ष को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने चाहिए, न कि किसी विशेष व्यक्ति के हितों की रक्षा के लिए सदन का कीमती समय बर्बाद करना चाहिए।
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इस बहस में हस्तक्षेप करते हुए राहुल गांधी के व्यवहार पर प्रश्नचिह्न लगाए। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे से सीधा सवाल पूछा कि उनके नेता सदन की नियमावली का पालन क्यों नहीं करते हैं? रिजिजू ने कहा कि पिछले कई दिनों से विपक्ष द्वारा जो आचरण किया जा रहा है, वह संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन भावनाओं से नहीं बल्कि नियमों और प्रोटोकॉल से चलता है। रिजिजू ने सत्ता पक्ष का बचाव करते हुए कहा कि सरकार चर्चा के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल गतिरोध पैदा करना चाहता है।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में बुधवार को लोकसभा में हुए आठ सांसदों का निलंबन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का टला हुआ भाषण है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी के भाषण पर शुरू हुआ विवाद अब राज्यसभा तक पहुँच गया है। किरेन रिजिजू ने कहा कि देश और सदन के अन्य सदस्य प्रधानमंत्री को सुनना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस की जिद ने इस प्रक्रिया को बाधित कर रखा है। विपक्ष जहां सरकार पर ‘तानाशाही’ का आरोप लगा रहा है, वहीं भाजपा ने इसे राहुल गांधी बनाम संसदीय नियमों की लड़ाई बना दिया है।
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