Bijapur Boat Accident
Bijapur Boat Accident: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। भैरमगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले उसपरी घाट पर बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। नदी पार करते समय ग्रामीणों से भरी एक डोंगी (छोटी नाव) अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस भयानक हादसे के दौरान नाव में कुल 6 लोग सवार थे। दुखद बात यह है कि इनमें से 4 लोग नदी की उफनती लहरों में लापता हो गए हैं, जिनमें दो महिलाएं और दो मासूम बच्चे शामिल हैं। नाव पर सवार दो युवकों ने किसी तरह तैरकर अपनी जान बचाई और किनारे पर पहुंचकर घटना की जानकारी दी।
यह हादसा बुधवार देर शाम उस वक्त हुआ जब ग्रामीण साप्ताहिक बाजार से अपनी रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदकर वापस लौट रहे थे। लापता हुए सभी लोग बीजापुर के दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र के बोड़गा गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। बाजार से घर लौटते समय झिल्ली घाट के पास यह दुखद मोड़ आया। ग्रामीणों के पास घर का राशन और अन्य जरूरी सामग्री थी, जो नाव पलटने के साथ ही नदी में समा गई।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इन दिनों इंद्रावती नदी का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ है और पानी का बहाव अत्यंत तीव्र है। शाम के समय जब डोंगी मंझधार में पहुँची, तो वह पानी के तेज थपेड़ों को बर्दाश्त नहीं कर पाई और असंतुलित होकर पलट गई। लापता महिलाएं और बच्चे देखते ही देखते पानी की गहराई में ओझल हो गए। जान बचाकर निकले युवकों ने बताया कि बहाव इतना तेज था कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
हादसे की खबर मिलते ही राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गईं। नगर सेना (होमगार्ड) के गोताखोरों को भी तत्काल अलर्ट पर रखा गया। हालांकि, शाम ढलने और चारों ओर घना अंधेरा फैल जाने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नदी की खतरनाक स्थिति और कम विजिबिलिटी के चलते प्रशासन ने फैसला लिया कि सघन खोज अभियान गुरुवार सुबह से शुरू किया जाएगा। सुबह होते ही मोटर बोट और अनुभवी गोताखोरों की टीम लापता लोगों की तलाश में जुट गई है।
यह हादसा एक बार फिर इलाके में बुनियादी ढांचे और पुलों के अभाव की पोल खोलता है। इंद्रावती नदी के उस पार बसे दर्जनों गांवों के लिए आज भी लकड़ी की डोंगी ही आवागमन का एकमात्र साधन है। चाहे पीडीएस का सरकारी राशन लाना हो, इलाज के लिए अस्पताल जाना हो या साप्ताहिक बाजार करना हो, इन ग्रामीणों को हर बार अपनी जान हथेली पर रखकर नदी पार करनी पड़ती है। पक्के पुल की वर्षों पुरानी मांग अब भी अधूरी है, जिसका खामियाजा गरीब ग्रामीणों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
बीजापुर की यह घटना न केवल एक परिवार की तबाही की कहानी है, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों के संघर्ष का प्रतीक है जो हर दिन मौत से जूझते हैं। प्रशासन के रेस्क्यू ऑपरेशन पर सबकी निगाहें टिकी हैं, लेकिन सवाल वही बना हुआ है कि कब तक ग्रामीण इन असुरक्षित डोंगियों के भरोसे रहेंगे?
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