Bijapur Lightning Incident
Bijapur Lightning Incident : छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल और वनांचल क्षेत्र बीजापुर जिले से एक बेहद ही दुखद और नुकसानदेह खबर सामने आई है। यहाँ के भैरमगढ़ विकासखंड (ब्लॉक) के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पोंदुम में शनिवार की देर रात प्रकृति का ऐसा तांडव देखने को मिला, जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। रात के सन्नाटे में अचानक मौसम का मिजाज बदला और मूसलाधार बारिश के साथ भीषण आकाशीय बिजली गिरी। इस आकाशीय गाज की चपेट में आने के कारण एक ही स्थान पर मौजूद बेजुबान मवेशियों की दर्दनाक मौत हो गई। इस प्राकृतिक आपदा के बाद से पूरे पोंदुम गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की देर रात इलाके में अचानक घने काले बादल छा गए और देखते ही देखते तेज आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। इस दौरान आसमान में भयानक गड़गड़ाहट और गरज-चमक हो रही थी। तेज बारिश और आंधी से बचने के लिए गांव के कई मवेशी सुरक्षित स्थान की तलाश में एक पेड़ के नीचे या खुले मैदान में एक साथ आकर बैठ गए थे। इसी बीच, अचानक एक जोरदार धमाके के साथ सीधे मवेशियों के झुंड पर आसमानी बिजली आ गिरी। बिजली का झटका इतना जोरदार और जानलेवा था कि वहां बैठे सभी मवेशियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
रात के वक्त हुए इस भीषण हादसे की भनक ग्रामीणों को तुरंत नहीं लग सकी। लेकिन जैसे ही सुबह की पहली किरण फूटी और ग्रामीण अपने रोजमर्रा के कामों और मवेशियों को देखने के लिए बाहर निकले, तो उनके होश उड़ गए। मैदान में एक ही जगह पर मवेशी मृत अवस्था में पड़े हुए थे। यह खौफनाक और दुखद मंजर देखकर मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने तुरंत इस अनहोनी की जानकारी ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों, सरपंच और स्थानीय राजस्व प्रशासन के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला और पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हुई ताकि स्थिति का जायजा लिया जा सके।
ग्रामीणों ने बेहद भावुक होकर बताया कि ग्रामीण इलाकों में मवेशी ही किसानों और पशुपालकों की असली पूंजी होते हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बैलों और बछड़ों की मौत होने से इन गरीब परिवारों को असहनीय और भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। कई परिवारों के लिए ये मवेशी ही खेती-किसानी और आजीविका का एकमात्र सहारा थे। इस अचानक आई आपदा ने उनके सामने भूखों मरने की नौबत ला दी है। इस भीषण संकट की घड़ी में, प्रभावित पीड़ित परिवारों और समस्त ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ सरकार से तत्काल सर्वे कराकर उचित और सम्मानजनक आर्थिक मुआवजा राशि देने की पुरजोर मांग की है।
इस दर्दनाक आकाशीय हादसे में जिन गरीब और सीधे-साधे ग्रामीणों के मवेशियों की जान गई है, उनकी पहचान स्थानीय प्रशासन द्वारा कर ली गई है। इन पीड़ित पशुपालकों में मुख्य रूप से लक्षण हपका, बुधराम हपका, दशरथ बघेल, सोमी पिंकी बघेल, कुंवर हपका, आसमती हपका और मुन्नू हेमला जैसे ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, मृत मवेशियों में ज्यादातर खेती के काम आने वाले कीमती बैल और छोटे बछड़े थे। खेती का सीजन शुरू होने से ठीक पहले बैलों की इस असामयिक मौत ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है, जिससे अब उनके सामने खरीफ फसल की बुआई को लेकर भी एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
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