Fake Job Racket
Fake Job Racket : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर पेश करने वाली खबर सामने आई है। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर मासूम और बेरोजगार युवाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाने वाले अपराधियों के खिलाफ स्थानीय न्यायालय ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। आबकारी विभाग में सरकारी नौकरी लगाने का झूठा झांसा देकर एक लाख रुपये की धोखाधड़ी करने और पीड़ित को जाली नियुक्ति पत्र सौंपने वाले आरोपी को माननीय न्यायालय सूरजपुर ने दोषी करार दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराधी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास (कठोर जेल) की सजा सुनाई है, जिसे क्षेत्र में ठगी करने वालों के लिए एक कड़ा और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।
इस पूरे आपराधिक मामले की शुरुआत साल 2018 में हुई थी। प्रकरण के अनुसार, पीड़ित प्रार्थी अशोक दास ने 10 जुलाई 2018 को सूरजपुर के थाना प्रेमनगर में एक लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अशोक ने अपनी शिकायत में बताया था कि ग्राम चंदननगर के रहने वाले हेमंत महंत नाम के व्यक्ति ने उससे संपर्क किया और आबकारी विभाग में भृत्य (चपरासी) के खाली पद पर उसकी पक्की सरकारी नौकरी लगवाने का पूरा भरोसा दिलाया। सरकारी नौकरी की चाह में पीड़ित आरोपी के झांसे में आ गया। आरोपी हेमंत ने इस काम के एवज में प्रार्थी से ₹1 लाख की मोटी रकम ऐंठ ली और कुछ दिनों बाद उसे बकायदा आबकारी विभाग का एक नियुक्ति आदेश (जॉइनिंग लेटर) भी सौंप दिया।
नियुक्ति पत्र हाथ में आने के बाद जब प्रार्थी अशोक दास बेहद खुशी-खुशी अपनी जॉइनिंग और नौकरी के संबंध में आगे की औपचारिकताओं की जानकारी लेने संबंधित सरकारी विभाग के कार्यालय पहुंचा, तो वहां के अधिकारियों ने जो बताया उसे सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसा कोई नियुक्ति आदेश कार्यालय से जारी ही नहीं किया गया है और उसे दिया गया कागजात पूरी तरह से जाली और फर्जी है। अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी और गाढ़े पसीने की कमाई डूबने का अहसास होते ही पीड़ित तुरंत पुलिस की शरण में पहुंचा।
पीड़ित अशोक दास की लिखित शिकायत के आधार पर प्रेमनगर थाना पुलिस ने बिना किसी देरी के आरोपी हेमंत महंत के खिलाफ अपराध क्रमांक 53/18 के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा का फर्जीवाड़ा), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना) के तहत एक गंभीर आपराधिक मामला दर्ज कर अपनी विवेचना शुरू की। इस पूरे संवेदनशील मामले की बारीकी से जांच तत्कालीन विवेचक और पुलिस निरीक्षक बसंत लाल सिंह द्वारा की गई। जांच के दौरान पुलिस टीम ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य जुटाए और आरोपी हेमंत महंत (पिता सुंदर दास सोनवानी) को धर दबोचा।
अदालत में चले इस लंबे मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी (ADPO) राजेश सिंह और पंकज कुमार बागड़े ने बेहद प्रभावी, तार्किक और दमदार पैरवी की। उन्होंने अदालत के सामने पीड़ित के बयान और पुलिस द्वारा इकट्ठा किए गए फर्जी दस्तावेजों को अकाट्य साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले की अंतिम सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सूरजपुर की न्यायाधीश रूचि मिश्रा की अदालत में संपन्न हुई। माननीय न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद आरोपी हेमंत महंत को निर्विवाद रूप से धोखाधड़ी और जालसाजी का मुख्य दोषी पाया।
न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपने अंतिम निर्णय में आरोपी हेमंत महंत को धारा 420 आईपीसी के तहत पूर्ण रूप से दोषी पाते हुए 3 वर्ष के कठोर कारावास और साथ ही ₹500 के आर्थिक दंड (अर्थदंड) की सजा से दंडित किया है। यदि आरोपी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त जेल काटनी होगी। कानून के जानकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि न्यायालय के इस त्वरित और सख्त फैसले से क्षेत्र में सक्रिय नौकरी दिलाने वाले फर्जी गिरोहों और बिचौलियों के हौसले पूरी तरह पस्त होंगे और सीधे-साधे ग्रामीण युवाओं के साथ होने वाले वित्तीय अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने में बड़ी मदद मिलेगी।
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