Bijapur Fire Action
Bijapur Fire Action : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक बेहद बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक खबर सामने आ रही है। हाल ही में बीजापुर के एक बड़े तेंदूपत्ता गोदाम में लगी भीषण और विनाशकारी आग के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। इस पूरे अग्निकांड की घटना में घोर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को देखते हुए सरकार ने साल 2013 बैच के वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी और बीजापुर के जिला वन अधिकारी (DFO) रमेश जांगड़े को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।
प्रशासन द्वारा की गई इस त्वरित और कड़ी कार्रवाई के बाद पूरे वन विभाग और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। सरकार ने उनकी जगह पर भारतीय वन सेवा के तेजतर्रार अधिकारी जाधव सागर रामचंद्र को बीजापुर जिले का नया डीएफओ (DFO) नियुक्त कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में महज तीन दिन पहले एक सरकारी तेंदूपत्ता गोदाम में अचानक से भीषण आग लग गई थी। देखते ही देखते आग की गगनचुंबी लपटों ने पूरे गोदाम को अपनी आगोश में ले लिया था। आग इतनी ज्यादा भयानक और अनियंत्रित थी कि गोदाम के भीतर संग्रहित करके रखा गया भारी मात्रा में कीमती तेंदूपत्ता और वन विभाग की अन्य जरूरी सामग्रियां जलकर पूरी तरह से खाक हो गईं। इस अग्निकांड के कारण सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस दर्दनाक और हैरान करने वाली घटना के तुरंत बाद से ही स्थानीय प्रशासन, वन विभाग की लचर कार्यप्रणाली और गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे थे।
तेंदूपत्ता गोदाम में हुए इस भारी नुकसान और सुरक्षा व्यवस्था में हुई इस बड़ी चूक को राज्य सरकार ने अत्यंत संजीदगी और गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री और वन मंत्रालय के निर्देश पर विभाग ने बिना कोई वक्त गंवाए त्वरित कार्रवाई की। वन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, बीजापुर के डीएफओ रमेश जांगड़े को उनके पद से बेदखल कर दिया गया है। प्रशासनिक गलियारों और राजनैतिक हलकों में इसे सरकार की एक बहुत बड़ी और सख्त दंडात्मक कार्रवाई माना जा रहा है। सरकार ने इस कड़े फैसले के जरिए यह साफ संदेश देने की कोशिश की है कि शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अगर बात करें हटाए गए अधिकारी की, तो रमेश जांगड़े साल 2013 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) के एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी हैं। बीजापुर जिले में उनकी पोस्टिंग के दौरान से ही वहां का तेंदूपत्ता प्रबंधन, संग्रहण नीतियां और वन विभाग की अन्य अंदरूनी गतिविधियां लगातार विवादों और चर्चाओं के घेरे में बनी हुई थीं। स्थानीय स्तर पर भी वन संपदा के रख-रखाव को लेकर कई बार शिकायतें सामने आ रही थीं। ऐसे में इस भीषण आगजनी की घटना ने जलती आग में घी डालने का काम किया, जिसके बाद सरकार ने सीधे तौर पर उनकी प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए उन्हें पदमुक्त करने का फरमान जारी कर दिया।
सरकार के नए आदेश के तहत अब जाधव सागर रामचंद्र को बीजापुर का नया जिला वन अधिकारी (DFO) नियुक्त किया गया है, जिन्होंने जिले में कानून व्यवस्था और वन संपदा की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कमान संभाल ली है। दूसरी ओर, विभागीय सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक इस पूरे भीषण अग्निकांड की एक उच्च स्तरीय और गहन जांच अभी भी तेजी से जारी है। वन विभाग और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीमें बारीकी से यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गोदाम में आखिरकार यह आग कैसे लगी, क्या यह कोई दुर्घटना थी या फिर इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश थी।
इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था में कहां और किस स्तर पर चूक हुई, इसकी भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कुछ और बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
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