Bengal Political Crisis
Bengal Political Crisis : पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य की सत्ता हाथ से निकलने के बाद से ही अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के कई शीर्ष नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पहले से ही जारी थी, लेकिन अब बात ममता बनर्जी की पार्टी के वजूद पर आ खड़ी हुई है। हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बहुत बड़ा राजनीतिक ‘खेला’ होने के संकेत मिल रहे हैं। पराजय के बाद से ही टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी भगदड़ मची हुई है, जिससे पार्टी बिखरने की कगार पर पहुंच गई है।
इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, बांकुरा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सौमित्र खान ने एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है जिसने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सौमित्र खान का कहना है कि टीएमसी के कई बड़े चेहरे अब ममता बनर्जी का साथ छोड़ने का मन बना चुके हैं। उनके मुताबिक, “तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से लगभग 50 विधायक भाजपा का दामन थामने के लिए पूरी तरह से बेकरार बैठे हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, टीएमसी के 29 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद भी पाला बदलने के लिए बिल्कुल तैयार हैं।” खान ने आगे स्पष्ट किया कि अब गेंद पूरी तरह से भाजपा के केंद्रीय आलाकमान के पाले में है। जैसे ही दिल्ली से हरी झंडी या कोई आदेश आता है, टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगी और उसके सांसद-विधायक औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो जाएंगे।
भाजपा सांसद के इस चौंकाने वाले दावे का जमीन पर असर भी अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। ममता बनर्जी के इस गढ़ में बड़े पैमाने पर आंतरिक विद्रोह की शुरुआत हो चुकी है। इस बगावत का नेतृत्व बारासात से टीएमसी की कद्दावर सांसद काकोली घोष दस्तीदार करती नजर आ रही हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, काकोली घोष अपनी पार्टी के ६ अन्य विधायकों को साथ लेकर राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल होने पहुंच गईं। टीएमसी सांसद और इन विधायकों का मुख्यमंत्री की बैठक में इस तरह हिस्सा लेना इस बात का सीधा प्रमाण है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और इन नेताओं ने ममता बनर्जी के खिलाफ खुले तौर पर विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सांसद काकोली घोष के साथ तृणमूल कांग्रेस के कई कद्दावर विधायक भी मौजूद थे। बैठक में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरों में देगंगा विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी विधायक अनीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर की विधायक बीना मंडल और हरोआ से विधायक मोहम्मद अब्दुल मतीन का नाम शामिल है। इसके अतिरिक्त, बसीरहाट क्षेत्र के तीन अन्य टीएमसी विधायकों ने भी इस बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन विधायकों का मुख्यमंत्री की आधिकारिक बैठक में जाना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले बड़े राजनीतिक दलबदल का एक स्पष्ट संकेत है।
तृणमूल कांग्रेस में चल रहा यह संकट केवल शीर्ष नेतृत्व, सांसदों या विधायकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद से अब तक टीएमसी के करीब 100 से अधिक काउंसिलर (पार्षद) अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण डायमंड हार्बर में देखने को मिला, जहां 16 सदस्यों वाली नगर पालिका के 8 तृणमूल पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही, सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने तीन दिन पहले ही जिला अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देकर अपने इरादे साफ कर दिए थे। जमीनी स्तर से लेकर संसद तक फैली यह बगावत बताती है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का किला अब ढहने की कगार पर है।
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