Bijnor Crime News : उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक अत्यंत घिनौना मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। मंडावली थाना क्षेत्र में एक कलयुगी पिता पर अपनी ही 16 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगा है। इस कुकृत्य का खुलासा तब हुआ जब किशोरी गर्भवती हो गई। घटना के सामने आते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों के साथ-साथ परिवार में भी गहरा आक्रोश है। इस संवेदनहीन कृत्य ने समाज में सुरक्षा व्यवस्था और पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, आरोपी की तलाश जारी
इस जघन्य अपराध पर मंडावली थाना प्रभारी राकेश कुमार ने जानकारी दी कि पीड़िता को तत्काल प्रभाव से सहायता और सुरक्षा के लिए ‘वन स्टॉप सेंटर’ पहुंचाया गया है, जहां उसे हर संभव मदद दी जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) आकांक्षा गौतम ने स्पष्ट किया कि आरोपी पिता के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण (मेडिकल) भी करवा लिया है। सीओ ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है और आरोपी की धर-पकड़ के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपी को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

पीलीभीत की घटना से मिलती-जुलती क्रूरता
यह दुखद घटना केवल एक अकेली वारदात नहीं है, बल्कि इससे पहले अप्रैल 2026 में पीलीभीत से भी इसी तरह का रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया था। वहां एक सौतेले पिता ने अपनी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाया था। उस मामले में भी पीड़िता के गर्भवती होने पर ही दरिंदगी का खुलासा हुआ था, जिसके बाद मां ने अपने पति के खिलाफ केस दर्ज कराया था। बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से यह सवाल उठना लाजिमी है कि लड़कियां आखिर अपने ही घर में खुद को असुरक्षित क्यों महसूस कर रही हैं?
कानूनी सख्ती के बावजूद घटनाओं पर अंकुश की जरूरत
दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए देश में कानून पहले से ही काफी सख्त हैं और सरकारें जागरूकता अभियान भी चलाती रही हैं। इसके बावजूद ऐसी घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जो चिंता का विषय है। समाज के भीतर छिपे इन दरिंदों पर लगाम लगाने के लिए केवल मौजूदा कानून ही काफी नहीं हैं, बल्कि अब एक नई और प्रभावी रणनीति की आवश्यकता है। समाज में सुरक्षा का माहौल तभी बन पाएगा जब दोषियों को न केवल त्वरित सजा मिले, बल्कि इसे एक कड़ा संदेश भी माना जाए। यदि बेटियां घर की चारदीवारी में भी सुरक्षित नहीं हैं, तो यह संपूर्ण व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। इन घटनाओं को जड़ से खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों और सख्त न्यायिक प्रक्रिया की तत्काल आवश्यकता है।
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