BJP vs Congress: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूची में धांधली को लेकर गुरुवार को चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राहुल गांधी ने ‘Gen Z‘ का आह्वान करते हुए संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की अपील की, जिस पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने इसे भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिश करार दिया है।

राहुल गांधी ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में कहा, “देश के युवा, देश के छात्र, देश की Gen Z संविधान की रक्षा करेंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट चोरी रोकेंगे। मैं हमेशा उनके साथ खड़ा रहूँगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थकों, दलितों और आदिवासियों के वोट जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।

भाजपा नेता और सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और पलटवार करते हुए कहा, “Gen Z वंशवाद के खिलाफ हैं। नेहरू, इंदिरा, राजीव और सोनिया के बाद वे राहुल को क्यों स्वीकार करेंगे? जनरल जी भ्रष्टाचार और वैचारिक अस्पष्टता के भी खिलाफ हैं। अगर जनरल जी जाग गए, तो कांग्रेस नेताओं को देश छोड़कर भागना पड़ेगा।”
दुबे ने राहुल पर यह भी आरोप लगाया कि वह नेपाल जैसी स्थिति भारत में पैदा करना चाहते हैं, जहां हाल ही में जनरल जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन हुआ था और सरकार को सत्ता से हटना पड़ा।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सभी आरोप आधारहीन हैं। ठाकुर ने दावा किया कि राहुल गांधी बिना सबूत के केवल नाटक कर रहे हैं और उनका असली मकसद वोटर लिस्ट में अवैध घुसपैठियों को बचाना है।
राजनीतिक आरोपों के पीछे चुनावी रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान आगामी चुनावों के मद्देनज़र जन समर्थन जुटाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ‘जनरल जी’ शब्द का प्रयोग कर वह देश के युवाओं और आम नागरिकों को सक्रिय राजनीति में भागीदारी के लिए प्रेरित करना चाह रहे हैं। वहीं, भाजपा इस बयान को देश की संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ साजिश के रूप में पेश कर रही है।
राहुल गांधी और भाजपा के बीच यह ताजा टकराव बताता है कि चुनावी माहौल गरमा चुका है। एक ओर जहां कांग्रेस लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर चुनाव आयोग और सरकार पर गंभीर आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा इसे राष्ट्रविरोधी गतिविधि के तौर पर देख रही है। ‘जनरल जी’ शब्द अब राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन चुका है।
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