Shakuntala Singh Porte : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की प्रतापपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दिए गए उनके एक बयान पर पुलिस विभाग और अधिवक्ता समुदाय की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई थी। मामला तूल पकड़ने के बाद विधायक ने सार्वजनिक रूप से सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगती हैं।

पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान दिया था बयान
यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते हरिनंदन राजवाड़े हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने पहुंची थीं। परिवार से बातचीत के दौरान उन्होंने एक टिप्पणी की, जिसे बाद में सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में व्यापक रूप से प्रसारित किया गया। इसी बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया और कई लोगों ने इसे पुलिस विभाग तथा अधिवक्ता समुदाय के प्रति आपत्तिजनक बताया। बयान सामने आने के बाद विभिन्न संगठनों ने इसका विरोध दर्ज कराया।

बयान पर पुलिस और अधिवक्ताओं ने जताई नाराजगी
विवादित वीडियो सामने आने के बाद पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच नाराजगी बढ़ गई। दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों ने कहा कि विधायक की टिप्पणी उनके पेशे और सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने इस बयान को अनुचित बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की। मामले ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना लिया। कई लोगों ने सार्वजनिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधियों से जिम्मेदारी के साथ बयान देने की अपेक्षा भी जताई।
विधायक ने दी अपने बयान पर सफाई
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विवाद बढ़ने के बाद शकुंतला सिंह पोर्ते ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिससे उसका वास्तविक अर्थ बदल गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी वर्ग का अपमान करना नहीं था। विधायक ने कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी व्यक्ति, पुलिसकर्मी या अधिवक्ता को ठेस पहुंची है, तो वह इसके लिए दिल से क्षमा मांगती हैं।
पुलिस और वकील समुदाय से मांगी माफी
शकुंतला सिंह पोर्ते ने विशेष रूप से पुलिस विभाग और अधिवक्ता समुदाय से माफी मांगते हुए कहा कि उनका इन दोनों वर्गों के प्रति पूरा सम्मान है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं पेशे से वकील रही हैं और उनके पति पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। ऐसे में वह इन दोनों वर्गों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने की सोच भी नहीं सकतीं। उनके अनुसार उनका उद्देश्य केवल पीड़ित परिवार के दर्द को साझा करना था, किसी भी पेशे या समुदाय को निशाना बनाना नहीं।
व्यक्तिगत संबंधों का भी किया उल्लेख
अपनी सफाई में विधायक ने कहा कि कानून और पुलिस व्यवस्था से उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि एक वकील के रूप में उन्होंने न्याय व्यवस्था को करीब से देखा है और उनके परिवार का भी पुलिस विभाग से संबंध है। इसलिए किसी भी तरह से इन संस्थाओं का अपमान करना उनकी मंशा नहीं थी। उन्होंने लोगों से अपील की कि उनके बयान को सही संदर्भ में समझा जाए।

माफीनामे के बाद विवाद हुआ कुछ शांत
विधायक की ओर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के बाद विवाद कुछ हद तक शांत होता दिखाई दे रहा है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा अभी भी जारी है। विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस मामले पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। वहीं, कई लोगों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक मंचों पर शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करना चाहिए।
जिम्मेदार बयान देने की उठी मांग
इस घटना के बाद एक बार फिर सार्वजनिक जीवन में भाषा और अभिव्यक्ति की जिम्मेदारी को लेकर बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों के बयान का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है, इसलिए उन्हें किसी भी टिप्पणी से पहले उसके संभावित प्रभावों पर विचार करना चाहिए। फिलहाल शकुंतला सिंह पोर्ते ने अपनी ओर से माफी मांगकर विवाद को समाप्त करने का प्रयास किया है। अब यह देखना होगा कि संबंधित समुदाय और राजनीतिक दल इस स्पष्टीकरण को किस रूप में स्वीकार करते हैं तथा आगे इस मामले में कोई नई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।
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