Ahmedabad: Patidar Anamat Andolan Samiti (PAAS) convener Hardik Patel talks to the media, in Ahmedabad on July 25, 2018. A Gujarat court on Wednesday sentenced Patidar agitation spearhead Hardik Patel and two of his associates to two years in jail on charges of vandalising a BJP legislator's office in Mehsana district in 2015. Patel was arrested and released on bail, and subsequently barred by the court from entering Mehsana district. (Photo: IANS)
Hardik Patel Arrest Warrant: गुजरात की राजनीति में कभी पाटीदार आरक्षण आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे और अब भाजपा विधायक हार्दिक पटेल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। बुधवार को अहमदाबाद ग्रामीण कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने यह कार्रवाई एक पुराने मामले में पेश न होने पर की है।
हार्दिक पटेल के खिलाफ यह गिरफ्तारी वारंट 2015 के पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज एक दंगा और भड़काऊ भाषण के मामले में जारी हुआ है। उस समय हार्दिक पटेल पाटीदार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे और राज्य सरकार के खिलाफ तीखे भाषण दे रहे थे। इसी सिलसिले में उनके खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान हार्दिक पटेल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था, लेकिन वह पेश नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर पेश करने के निर्देश दिए हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि कोर्ट द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किया जाना एक गंभीर मामला है। यदि हार्दिक पटेल जल्द ही अदालत में पेश नहीं होते हैं या अग्रिम जमानत की कोशिश नहीं करते, तो उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है, जिससे उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
हार्दिक पटेल ने गुजरात की राजनीति में अपनी शुरुआत एक आंदोलनकारी नेता के रूप में की थी। उन्होंने पाटीदार समुदाय को आरक्षण दिलाने के लिए राज्यभर में बड़े आंदोलन किए थे। इसके चलते उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। हालांकि, बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा, लेकिन 2022 से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए और विधायक चुने गए।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हार्दिक पटेल इस गिरफ्तारी वारंट पर कानूनी कदम क्या उठाते हैं। क्या वे अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट का रुख करेंगे या खुद को गिरफ्तारी के लिए प्रस्तुत करेंगे, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। गुजरात में हार्दिक पटेल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट ने एक बार फिर राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। 2015 के पाटीदार आंदोलन से शुरू हुई उनकी यात्रा अब एक राजनीतिक मोड़ और कानूनी चुनौती के साथ सामने आ रही है। देखना होगा कि हार्दिक इस स्थिति से कैसे निपटते हैं और यह मामला उनके राजनीतिक भविष्य को किस तरह प्रभावित करता है।
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