BMC Election 2026
BMC Election 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार, 24 दिसंबर को एक ऐतिहासिक मोड़ आया, जब लंबे समय से अलग राहों पर चल रहे दो भाई—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—एक बार फिर साथ आ गए। आगामी 15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों से ठीक पहले हुए इस गठबंधन ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के इस मिलन से न केवल ठाकरे परिवार के समर्थकों में भारी उत्साह है, बल्कि विरोधियों के खेमे में भी हलचल तेज हो गई है।
काफी समय से कयास लगाए जा रहे थे कि क्या दोनों भाई मुंबई की सत्ता बचाने के लिए हाथ मिलाएंगे? बुधवार को इन अटकलों पर विराम लग गया। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने औपचारिक रूप से गठबंधन की घोषणा कर दी है। इस फैसले को मुंबई के राजनीतिक गढ़ पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता, जो अब तक एमएनएस के साथ वैचारिक और चुनावी मतभेदों से जूझ रहे थे, अब इस नए गठबंधन को लेकर सड़कों पर जश्न मनाते नजर आए।
उद्धव ठाकरे वर्तमान में महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन का हिस्सा हैं, जिसमें कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी भी शामिल है। एमएनएस के साथ इस नए तालमेल पर कांग्रेस की ओर से पहली प्रतिक्रिया वरिष्ठ नेता विजय वड्डेटीवार ने दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि एक ही परिवार के दो सदस्य आपसी मनमुटाव भुलाकर साथ आते हैं, तो कांग्रेस को इससे कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर मुंबई में दो भाई साथ आने का फैसला करते हैं, तो हम बिल्कुल खुश हैं। जब कोई परिवार एकजुट होता है, तो हमें नाराज होने का कोई कारण नहीं दिखता।”
हालाँकि वड्डेटीवार ने उद्धव और राज के व्यक्तिगत गठबंधन का स्वागत किया, लेकिन उन्होंने कांग्रेस की नीतिगत स्पष्टता भी सामने रखी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “कांग्रेस कभी भी राज ठाकरे की पार्टी (MNS) के साथ सीधे गठबंधन करने के लिए तैयार नहीं रही है और न ही भविष्य में ऐसा कोई विचार है।” यह बयान दर्शाता है कि महाविकास अघाड़ी के भीतर समीकरण अब और भी जटिल हो सकते हैं, जहाँ उद्धव एक तरफ कांग्रेस के साथ हैं और दूसरी तरफ अपने भाई राज ठाकरे के साथ।
नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए वड्डेटीवार ने हालिया निकाय चुनावों के परिणामों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस बिना किसी गठबंधन के सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। वड्डेटीवार ने कहा, “म्यूनसिपल काउंसिल के नतीजों ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस जनता की पहली पसंद है। चाहे वह कुल वोट शेयर हो, मेयर पद के उम्मीदवार हों या कॉर्पोरेटर की सीटें, हमने शरद पवार गुट और उद्धव गुट दोनों से बेहतर प्रदर्शन किया है।” उनके अनुसार, ये नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस कार्यकर्ता अब स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ना चाहते हैं।
विजय वड्डेटीवार ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए इसे महाराष्ट्र की अस्मिता और सत्ता पर कब्जे की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रुख हमेशा से शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार के साथ खड़े रहने का रहा है, लेकिन कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने ठाकरे भाइयों को आगामी चुनावों के लिए बधाई दी, लेकिन साथ ही यह संकेत भी दे दिया कि कांग्रेस आगामी बीएमसी चुनावों में अपनी स्वतंत्र ताकत दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब देखना यह होगा कि 15 जनवरी को मुंबई की जनता इस नए ‘ठाकरे पावर’ को कितना समर्थन देती है।
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