Vibha Choube KBC
Vibha Choube KBC: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लिए एक गौरवशाली क्षण सामने आया है। शिक्षा की लौ जलाने वाली एक साधारण शिक्षिका ने अपनी बौद्धिक क्षमता और अटूट आत्मविश्वास के दम पर देश के सबसे प्रतिष्ठित क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के मंच तक का सफर तय किया है। अंबिकापुर की रहने वाली विभा चौबे न केवल जिले की पहली महिला बनी हैं, बल्कि वे पूरे प्रदेश की पहली ऐसी महिला शिक्षिका हैं, जो महानायक अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर बैठकर सवालों का जवाब देंगी। उनकी यह उपलब्धि आज हर छत्तीसगढ़िया के लिए गर्व का विषय बन गई है।
सोनी टीवी और KBC द्वारा जारी किए गए आधिकारिक प्रोमो ने पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल बना दिया है। प्रोमो में साफ देखा जा सकता है कि विभा चौबे 31 दिसंबर और 1 जनवरी के विशेष एपिसोड में हॉट सीट पर विराजमान होंगी। वर्ष 2025 के विदाई और 2026 के स्वागत के इन ऐतिहासिक दिनों में विभा चौबे अपनी मेधा का प्रदर्शन करेंगी। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, सरगुजा जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है और लोग सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं।
विभा चौबे वर्तमान में दरिमा गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षिका के पद पर सेवा दे रही हैं। वे वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को शिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में समर्पित भाव से कार्य कर रही हैं। बच्चों को पढ़ाते समय उन्होंने कभी भी स्वयं का सीखना (Learning) बंद नहीं किया। निरंतर सामान्य ज्ञान और समसामयिक विषयों से अपडेट रहने की उनकी इसी लगन ने उन्हें आज राष्ट्रीय स्तर के इस मंच तक पहुँचाया है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि ज्ञान बाँटने से बढ़ता है और एक शिक्षक कभी भी विद्यार्थी बनना नहीं छोड़ता।
विभा की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके परिवार का अटूट सहयोग रहा है। उनके पति प्रमेंद्र चौबे, स्वयं शिक्षा जगत से जुड़े हैं और वर्तमान में मैनपाट मिडिल स्कूल में प्राचार्य के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एक ही पेशे से जुड़े इस दंपति ने हमेशा एक-दूसरे को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रमेंद्र चौबे ने विभा की तैयारी में हर कदम पर उनका साथ दिया। आज यह शिक्षक दंपति न केवल सरगुजा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए एक आदर्श मिसाल बनकर उभरा है।
विभा चौबे की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अंचल की उन तमाम महिलाओं और छात्राओं के लिए एक प्रेरणा है जो बड़े सपने देखने से कतराती हैं। उनकी सफलता संदेश देती है कि यदि आपके पास ज्ञान का भंडार और स्वयं पर भरोसा है, तो संसाधनों की कमी आपके सपनों के आड़े नहीं आ सकती। सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र से निकलकर मायानगरी मुंबई के इस मंच तक पहुँचना, महिला सशक्तिकरण की एक जीती-जागती मिसाल है।
छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग विभा चौबे की इस उपलब्धि से खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। विभाग के अधिकारियों और सहयोगियों का कहना है कि विभा ने यह सिद्ध कर दिया है कि एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका भी अपनी मेहनत से इतिहास रच सकती है। आने वाली पीढ़ियां और वर्तमान में कार्यरत शिक्षक विभा की इस सफलता से प्रेरित होकर शिक्षा के प्रति और अधिक समर्पित होंगे। विभा अब केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की वह बेटी हैं जिसने देश के पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
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