Health Tips : शरीर में गांठ दिखे तो न करें लापरवाही, ये संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें

Health Tips : शरीर में कहीं भी गांठ महसूस होना स्वभाविक रूप से चिंता का विषय बन जाता है, क्योंकि अक्सर इसे कैंसर की शुरुआती चेतावनी माना जाता है। इस विषय पर राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (RGCIRC) के वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मुदित अग्रवाल का कहना है कि हर गांठ का मतलब कैंसर नहीं होता। कई बार गांठें सामान्य सिस्ट, संक्रमण या फैटी टिश्यू (चर्बी) के जमाव के कारण भी हो सकती हैं। हालांकि, किसी भी गांठ को नजरअंदाज करना या उसे देख कर डर जाना—दोनों ही स्थितियां ठीक नहीं हैं। महत्वपूर्ण यह है कि गांठ के व्यवहार को समझें और समय रहते उचित मेडिकल सलाह लें।

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शरीर में गांठें कहां हो सकती हैं और कब सतर्क हों?

गांठें शरीर के किसी भी हिस्से में उभर सकती हैं, जैसे गर्दन, सीने, बगल (आर्मपिट), जांघों के जोड़ों या हाथ-पैरों में। अक्सर लोग इसे मामूली समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन यदि कोई गांठ दो से तीन हफ्ते से अधिक समय तक बनी रहे, या उसका आकार लगातार बढ़ रहा हो, तो यह डॉक्टर से जांच कराने का सही समय है। गांठ की आकृति में बदलाव आना भी एक संकेत है कि आपको इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।

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गांठ के साथ दिखने वाले खतरनाक लक्षण: बरतें अत्यधिक सावधानी

अक्सर लोग इस गलतफहमी में रहते हैं कि यदि गांठ में दर्द नहीं है, तो वह हानिकारक नहीं है। यह धारणा घातक साबित हो सकती है, क्योंकि कई तरह के कैंसर शुरुआती अवस्था में दर्द रहित होते हैं। निम्नलिखित लक्षणों को बिल्कुल अनदेखा न करें:

  • यदि गांठ कठोर है और आसपास के ऊतकों (tissues) के साथ मजबूती से जुड़ी हुई या स्थिर महसूस हो।

  • त्वचा के रंग में बदलाव, लालपन या वहां कोई घाव जैसा बनना।

  • गांठ के साथ-साथ लगातार बुखार का आना।

  • बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन का तेजी से गिरना।

  • अत्यधिक थकान महसूस होना या सोते समय पसीने की समस्या होना।

डॉक्टर गांठ की जांच कैसे करते हैं?

जब आप किसी गांठ की समस्या लेकर डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वे आपकी मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच से शुरुआत करते हैं। स्थिति की गंभीरता को समझने के लिए विशेषज्ञ कुछ आवश्यक टेस्ट की सलाह दे सकते हैं, जैसे अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राफी, सीटी स्कैन या एमआरआई। यदि डॉक्टर को संदेह होता है, तो ‘बायोप्सी’ (Biopsy) की जाती है। यह सबसे सटीक परीक्षण है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि गांठ कैंसरस (malignant) है या नॉन-कैंसरस (benign)।

समय पर जांच: स्वस्थ भविष्य की पहली प्राथमिकता

अंततः, यह समझना जरूरी है कि हर गांठ खतरनाक नहीं होती, लेकिन उसके सही कारण का पता केवल एक अनुभवी डॉक्टर ही लगा सकते हैं। यदि आपके शरीर में कोई नई गांठ उभरी है, जो समय के साथ बढ़ रही है या सख्त महसूस हो रही है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से मिलें। समय पर की गई जांच न केवल आपके मानसिक तनाव को कम करती है, बल्कि यदि समस्या गंभीर हो, तो उसका सही और प्रभावी इलाज भी संभव बनाती है। स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता ही बचाव का सबसे बड़ा माध्यम है।

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Chandan Das

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