Brazil political upheaval : ब्राज़ील में शुक्रवार को एक बड़ी सियासी हलचल उस समय देखने को मिली जब संघीय पुलिस ने पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के घर और उनके राजनीतिक मुख्यालय पर छापेमारी की। पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर की गई है।
हालांकि पुलिस के बयान में पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन ब्राज़ील के प्रमुख समाचार संस्थानों ने दावा किया है कि छापेमारी सीधे तौर पर बोल्सोनारो को निशाना बनाकर की गई। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि ब्राज़ील की न्यायपालिका और कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब सत्ता के दुरुपयोग और लोकतंत्र विरोधी साजिशों पर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। बोल्सोनारो ने 2019 से 2022 तक ब्राज़ील के राष्ट्रपति के रूप में शासन किया था। उन पर जनवरी 2023 में राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद नवनिर्वाचित राष्ट्रपति लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा को पदभार ग्रहण करने से रोकने की साजिश रचने का गंभीर आरोप है। यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित है, और यही कारण है कि उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने बोल्सोनारो को इलेक्ट्रॉनिक एंकल ब्रेसलेट पहनने का आदेश दिया है, ताकि उनकी गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके। इसके साथ ही उन्हें सोशल मीडिया का उपयोग न करने और अपने बेटे एडुआर्डो बोल्सोनारो, जो फिलहाल संयुक्त राज्य अमेरिका में हैं, से किसी भी प्रकार का संपर्क न रखने का निर्देश दिया गया है।
इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर बोल्सोनारो को कानूनी छूट नहीं दी जाती, तो वे ब्राजील से आने वाले उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की सिफारिश करेंगे। ट्रंप स्वयं भी 2021 में अमेरिकी चुनाव परिणामों को पलटने के प्रयासों को लेकर जांच का सामना कर चुके हैं, ऐसे में उनका बोल्सोनारो के पक्ष में आना सियासी हलचलों को और तीखा कर रहा है।
बोल्सोनारो के खिलाफ चल रही यह कार्रवाई ब्राज़ील में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम देश की राजनीति में भविष्य के समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर सकता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले पर कड़ी निगाह रखी जा रही है।
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