QUAD Meeting
QUAD Meeting : भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित क्वाड (QUAD) समूह की एक महत्वपूर्ण बैठक में पश्चिम एशिया का होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) का मुद्दा सबसे प्रमुखता से छाया रहा। इस रणनीतिक संगठन में शामिल चार प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक व्यापार को सुचारू बनाए रखने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को जल्दी से जल्दी पूरी तरह खोलने और वहां जारी तनाव को कम करने पर विस्तृत चर्चा की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्वाड की इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग से ईरान की चिंताएं बढ़ सकती हैं, क्योंकि बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने और बिना किसी बाधा या रुकावट के मालवाहक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर कड़ा संदेश दिया गया है।
इस महत्वपूर्ण शिखर बैठक की समाप्ति के बाद आयोजित एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के सामने कई बड़ी और जटिल चुनौतियां खड़ी हैं, जिनके कारण वैश्विक स्तर पर जरूरी वस्तुओं की सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके साथ ही भारतीय विदेश मंत्री ने सीमा पार आतंकवाद और कट्टरवाद के मुद्दे पर सदस्य देशों के साझा रुख को रेखांकित करते हुए दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ क्वाड देशों की नीति पूरी तरह से ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहिष्णुता) की है और इससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता।
क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की इस बैठक के संपन्न होने के बाद एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति (आधिकारिक बयान) भी जारी की गई। इस प्रेस रिलीज में कहा गया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए क्वाड के विदेश मंत्रियों की यह एक अत्यंत जरूरी और समयोचित बैठक थी। इस बैठक में मुख्य रूप से दुनिया के ताजा घटनाक्रमों और संवेदनशील हालातों पर ध्यान केंद्रित किया गया। क्वाड समूह का मुख्य आधार होने के नाते, चारों देशों ने हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र से जुड़े सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित रखा। चूंकि ये चारों राष्ट्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अलग-अलग कोनों पर स्थित समुद्री लोकतांत्रिक देश हैं, इसलिए वैश्विक स्थिरता के लिए इनके विचारों का यह आदान-प्रदान बेहद महत्वपूर्ण रहा।
साषा बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पिछले कुछ समय में सदस्य देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग का लगातार और व्यापक विस्तार हुआ है। इस रणनीतिक सहयोग में समुद्री निगरानी, क्षेत्र जागरूकता (डोमेन अवेयरनेस), सुदृढ़ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, महत्वपूर्ण पनडुब्बी केबल की सुरक्षा, संयुक्त सैन्य और तकनीकी ट्रेनिंग, सदस्य देशों की क्षमता निर्माण और मानवीय सहायता एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण (HADR) जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां शामिल हैं। चारों देशों ने इस बात पर पूर्ण सहमति व्यक्त की कि वे आने वाले समय में इन सभी रणनीतिक क्षेत्रों को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत तथा प्रभावी बनाएंगे।
क्वाड के चारों विदेश मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने सुरक्षित और बिना किसी बाधा के होने वाले वैश्विक समुद्री व्यापार के मुद्दे पर गहराई से बात की है। सभी देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता को दोहराया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चूंकि ये चारों राष्ट्र खुली बाजार अर्थव्यवस्था का समर्थन करते हैं, इसलिए इनका दृढ़ विश्वास है कि वैश्विक आर्थिक लचीलेपन को हर हाल में बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके लिए सप्लाई चेन को मजबूत करना, विश्वसनीय और सुरक्षित इंजीनियरिंग तकनीकों का प्रसार करना तथा वैश्विक स्तर पर प्रोडक्शन (उत्पादन) क्षमताओं को बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके अतिरिक्त, आज की चर्चाओं में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र (एनर्जी सेक्टर) की स्थिरता और कृषि विकास के लिए खाद (उर्वरक) की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष बातचीत हुई।
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