Union Budget 2026
Union Budget 2026: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए नवीनतम बजट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस बजट को जनविरोधी करार देते हुए केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। ममता बनर्जी का मानना है कि यह बजट न केवल राज्यों की विकास संबंधी जरूरतों को नजरअंदाज करता है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक साबित होगा। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह बजट केवल कागजी घोषणाओं का पुलिंदा है और धरातल पर इसकी उपयोगिता शून्य है।
बजट के विश्लेषण के बाद ममता बनर्जी ने सबसे पहले महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अक्सर मंचों से महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जब बजट आवंटित करने की बारी आती है, तो महिलाओं के हाथ खाली रह जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बजट में महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए कोई ठोस योजना या निवेश का प्रावधान नहीं किया गया है। उनके अनुसार, यह बजट आधी आबादी की जरूरतों के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन है।
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल का पक्ष रखते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बजट में बंगाल के लिए एक पैसा भी आवंटित नहीं किया गया है, जो राज्य के साथ हो रहे निरंतर भेदभाव का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बंगाल को उसके संवैधानिक हक से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे का अपमान कर रही है और बंगाल के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश कर रही है।
ममता बनर्जी ने बजट के बहाने चुनाव आयोग और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में केवल ‘SIR’ (संवैधानिक संस्थाओं का हस्तक्षेप) हो रहा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में कर रही है। उनके अनुसार, इन संस्थाओं का उपयोग राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ठेस पहुँचाने के लिए किया जा रहा है।
अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया कि यह बजट देश की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर करने वाला है। उन्होंने इसे एक ‘दिशाहीन’ दस्तावेज बताते हुए कहा कि इसमें आम जनता को महंगाई से राहत देने के लिए कोई योजना नहीं है। मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि बजट में रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए कोई रोडमैप नहीं होने के कारण आने वाले समय में देश को बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
बजट में प्रस्तावित तीन नए कॉरिडोर की घोषणा को मुख्यमंत्री ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने इसे एक चुनावी दिखावा और झूठ करार देते हुए कहा कि सरकार के पास इन कॉरिडोर के निर्माण के लिए न तो कोई स्पष्ट वित्त पोषण की योजना है और न ही कोई स्पष्ट समय सीमा। उन्होंने कहा कि जनता को लुभाने के लिए इस तरह के बड़े-बड़े दावे किए गए हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि इस बजट में भविष्य के प्रति कोई दूरदर्शिता नहीं दिखाई देती। इसमें न तो युवाओं के लिए उम्मीद है और न ही राज्यों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कोई उत्साहजनक पहल। उन्होंने इसे राज्यों और आम जनता की समस्याओं के प्रति आंखें मूंदने वाला बजट बताया, जो केवल चंद कॉरपोरेट घरानों के हितों की रक्षा करता है।
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