Attack on Gariaband Police
Attack on Gariaband Police: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ के मैनपुर थाना क्षेत्र में अवैध शराब की तस्करी और जब्ती से नाराज बदमाशों ने गश्त कर रहे पुलिस जवानों पर जानलेवा हमला कर दिया। रविवार की शाम हुई इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। हमला इतना योजनाबद्ध था कि ड्यूटी पर तैनात जवानों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। बदमाशों ने न केवल शासकीय कार्य में बाधा डाली, बल्कि वर्दी का खौफ खत्म करते हुए आरक्षकों पर लाठी-डंडों और टांगिया (कुल्हाड़ी) से वार किया।
यह पूरा मामला मैनपुर थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम कोसमी का है। मिली जानकारी के अनुसार, दर्रीपारा कैंप में तैनात आरक्षक परमेश्वर नेताम, विमल लकड़ा और विनोद मनहर रविवार शाम को नियमित ग्राम भ्रमण और पेट्रोलिंग पर निकले थे। जैसे ही पुलिस की यह टीम कोसमी गांव पहुँची, वहां पहले से घात लगाकर बैठे चार बदमाशों—भैयालाल देवंशी, गोरेलाल, उत्तम और गोलू देवंशी ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। बताया जा रहा है कि यह हमला पुरानी रंजिश और हाल ही में पुलिस द्वारा की गई अवैध शराब की जब्ती की कार्रवाई का बदला लेने के लिए किया गया था।
बदमाशों का इरादा पुलिसकर्मियों को जान से मारने का था। उन्होंने अचानक टांगिया और भारी डंडों से प्रहार करना शुरू कर दिया। इस हिंसक हमले में आरक्षक विमल लाकड़ा को गंभीर चोटें आई हैं और वे बुरी तरह लहूलुहान हो गए। जब उनके साथी आरक्षक परमेश्वर और विनोद ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो हमलावरों ने उन्हें भी नहीं बख्शा। तीनों पुलिसकर्मी इस हमले में घायल हुए हैं। चीख-पुकार सुनकर मौके पर जमा हुए स्थानीय ग्रामीणों ने साहस दिखाया और बीच-बचाव कर पुलिसकर्मियों की जान बचाई, अन्यथा कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस सक्रिय हुई और घायल जवानों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया। खाकी पर हमले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए हमले में शामिल चारों मुख्य आरोपियों—भैयालाल, गोरेलाल, उत्तम और गोलू को धर-दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने, हत्या के प्रयास और दंगा भड़काने जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
गरियाबंद डीएसपी गरिमा दादर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, जिनमें धारा 296, 115(2), 351(3), 109, 121(1), 127(2), 221, 132 और 3(5) शामिल हैं, के तहत केस दर्ज किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा और पुलिस का मनोबल गिराने की कोशिश करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घायल आरक्षकों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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